राजनीति

तमिलनाडु चुनाव 2026: NDA में सीटों का बंटवारा फाइनल; BJP 27, PMK 18 और AIADMK बड़े भाई की भूमिका में

तमिलनाडु की राजनीति में 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए बिसात बिछ चुकी है। विपक्षी गठबंधन (NDA) ने सत्तारूढ़ DMK को सत्ता से बेदखल करने के लिए अपने ‘सीट शेयरिंग’ फॉर्मूले पर मुहर लगा दी है। अन्नाद्रमुक (AIADMK) के नेतृत्व वाले इस गठबंधन में बीजेपी और अन्य क्षेत्रीय दलों के बीच सीटों का बंटवारा अंतिम रूप ले चुका है।

तमिलनाडु चुनाव 2026: NDA में सीटों का बंटवारा फाइनल; BJP 27, PMK 18 और AIADMK बड़े भाई की भूमिका में

चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव (23 अप्रैल 2026) के लिए विपक्षी खेमे से बड़ी खबर आई है। सोमवार को चेन्नई स्थित AIADMK मुख्यालय में हुई एक हाई-प्रोफाइल बैठक में NDA के घटक दलों के बीच सीटों का गणित तय हो गया। बैठक में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और AIADMK महासचिव ई. के. पलानीस्वामी (EPS) की मौजूदगी में चुनावी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

सीटों का गणित: किसे कितनी मिलीं?

कुल 234 विधानसभा सीटों वाले राज्य में NDA ने अपनी ताकत को इस प्रकार विभाजित किया है:

* AIADMK: गठबंधन के ‘बड़े भाई’ के रूप में सबसे अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

* BJP (भारतीय जनता पार्टी): 27 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।

* PMK (पट्टाली मक्कल काच्ची): 18 सीटें आवंटित की गई हैं।

* AMMK (टीटीवी दिनाकरण की पार्टी): 11 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

बैठक के प्रमुख चेहरे

इस रणनीतिक बैठक में अन्नाद्रमुक प्रमुख पलानीस्वामी के अलावा, बीजेपी के चुनाव प्रभारी पीयूष गोयल, प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन, पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास और एएमएमके के टीटीवी दिनाकरण शामिल थे।

“200 पार का लक्ष्य”: NDA का आत्मविश्वास

गठबंधन के नेताओं ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में सत्तारूढ़ DMK सरकार पर तीखे हमले किए:

* भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था: PMK अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने आरोप लगाया कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े हैं और DMK सरकार केवल ‘कमीशन और वसूली’ में व्यस्त है। उन्होंने दावा किया कि गठबंधन 234 में से 200 से ज्यादा सीटें जीतेगा।

* DMK का डर: रामदास ने तंज कसते हुए कहा कि अगर स्टालिन सरकार ने काम किया होता, तो उन्हें इतने बड़े कुनबे (गठबंधन) की जरूरत नहीं पड़ती।

* मजबूत विकल्प: बीजेपी नेता तमिलिसाई सौंदरराजन ने खुशी जताते हुए कहा कि यह एक ‘जीतने वाला गठबंधन’ है जो राज्य को वंशवाद की राजनीति से मुक्ति दिलाएगा।

चुनावी समीकरण

अन्नाद्रमुक ने इस बार अपने पुराने बागियों (AMMK) और मजबूत क्षेत्रीय पकड़ रखने वाली PMK को साथ लेकर एक ‘सोशल इंजीनियरिंग’ करने की कोशिश की है। बीजेपी की 27 सीटें भी शहरी और कुछ खास पॉकेट्स में उसके बढ़ते प्रभाव को दर्शाती हैं।

राजनीतिक गलियारों की चर्चा: “यह गठबंधन न केवल सीटों का बंटवारा है, बल्कि पलानीस्वामी के लिए अपनी नेतृत्व क्षमता और बीजेपी के लिए दक्षिण में अपनी जड़ों को गहरा करने की अग्निपरीक्षा भी है।”

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