मिशन 816: महिला आरक्षण कानून में बड़े बदलाव की तैयारी, लोकसभा में बढ़ेंगी सीटें
संसद के मौजूदा सत्र में महिला आरक्षण को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी की जा रही है। साल 2023 के ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में बड़े संशोधन के जरिए न केवल महिला सांसदों की संख्या बढ़ाई जाएगी, बल्कि लोकसभा की कुल सदस्य संख्या में भी भारी इजाफा देखने को मिल सकता है।
मिशन 816: महिला आरक्षण कानून में बड़े बदलाव की तैयारी, लोकसभा में बढ़ेंगी सीटें
नई दिल्ली: केंद्र सरकार महिला आरक्षण कानून में महत्वपूर्ण संशोधन लाने जा रही है, जिससे भारतीय संसदीय इतिहास का चेहरा पूरी तरह बदल सकता है। प्रस्तावित संशोधन के तहत लोकसभा के कुल सदस्यों की संख्या 543 से बढ़कर 816 हो सकती है। इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य महिला सांसदों की संख्या को बढ़ाकर 273 (कुल का एक तिहाई) करना है।
संशोधन के मुख्य बिंदु: क्या बदलेगा?
* सदस्य संख्या में वृद्धि: लोकसभा में अब 543 की जगह 816 सीटें होंगी।
* महिलाओं का कोटा: कुल 816 सीटों में से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
* जनगणना का आधार: सीटों के इस नए निर्धारण के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाया जा सकता है।
* कोटे के अंदर कोटा: एससी-एसटी महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण नहीं होगा, बल्कि उन्हें कुल 33% महिला कोटे के भीतर ही आरक्षण दिया जाएगा।
अमित शाह की ‘मिशन कंसेंसस’ बैठक
कानून में बदलाव को लेकर आम सहमति बनाने के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को विपक्षी दलों के साथ मैराथन बैठकें कीं:
* इन दलों से हुई चर्चा: एनसीपी (शरद पवार गुट), बीजेडी, शिवसेना (यूबीटी) और वाईएसआर कांग्रेस के नेताओं के साथ सकारात्मक बातचीत हुई।
* अभी बाकी हैं: कांग्रेस और टीएमसी जैसे बड़े विपक्षी दलों के साथ अभी बैठक होना बाकी है। सरकार की कोशिश है कि बिल को बिना किसी हंगामे के इसी सत्र में पास करा लिया जाए।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023) का फ्लैशबैक
सितंबर 2023 में संसद ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पास किया था, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान था। अब लगभग तीन साल बाद, सरकार इसके कार्यान्वयन को गति देने और सीटों की संख्या को संतुलित करने के लिए यह नया संशोधन ला रही है।
चुनौतियां और विपक्ष का रुख
विपक्ष के कुछ धड़े ‘OBC कोटे’ की मांग को लेकर अड़े हुए हैं। हालांकि, सरकार का तर्क है कि सीटों की कुल संख्या बढ़ाकर वह सभी वर्गों के हितों को साधने की कोशिश कर रही है। यदि यह संशोधन पास होता है, तो यह आजादी के बाद का सबसे बड़ा संसदीय सुधार होगा।
सूत्रों का दावा: “सीटों की संख्या बढ़ने से परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया भी आसान हो जाएगी और किसी भी मौजूदा पुरुष सांसद की सीट खतरे में नहीं पड़ेगी, जिससे राजनीतिक विरोध कम होने की उम्मीद है।”
