Sunday, September 6, 2026
Latest:
उत्तराखंडराष्ट्रीय

‘आप महज एक संदिग्ध आरोपी हैं, सनसनी न फैलाएं’: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने मोहम्मद दीपक कुमार को लगाई कड़ी फटकार

उत्तराखंड हाई कोर्ट से मोहम्मद दीपक कुमार को तगड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने न केवल उनकी याचिका को ‘कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग’ बताया, बल्कि उन्हें अपनी स्थिति (आरोपी) याद दिलाते हुए कड़ी फटकार भी लगाई।

‘आप महज एक संदिग्ध आरोपी हैं, सनसनी न फैलाएं’: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने मोहम्मद दीपक कुमार को लगाई कड़ी फटकार

नैनीताल: कोटद्वार के चर्चित जिम ट्रेनर मोहम्मद दीपक कुमार, जो कुछ समय पहले एक मुस्लिम दुकानदार का पक्ष लेने के कारण सुर्खियों में आए थे, उन्हें उत्तराखंड हाई कोर्ट से कड़ा संदेश मिला है। जस्टिस राकेश थपलियाल की पीठ ने दीपक द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की मांग की थी।

कोर्ट की तीखी टिप्पणियां: “प्रक्रिया का दुरुपयोग”

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता के आचरण पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा:

“जो व्यक्ति खुद आरोपी है, वह सुरक्षा की गुहार लगा रहा है और पुलिस के खिलाफ जांच की मांग कर रहा है? यह कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह से दुरुपयोग है। आप एक संदिग्ध आरोपी हैं और इस मुद्दे को सनसनीखेज बनाने की कोशिश कर रहे हैं।”

सुरक्षा की मांग पर सवाल

अदालत ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि FIR रद्द करवाने के लिए दायर याचिका में सुरक्षा की मांग कैसे की जा सकती है। बेंच ने इसे ‘दबाव बनाने की चाल’ करार देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता पुलिस पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार की उस दलील को भी स्वीकार किया जिसमें कहा गया था कि कुमार को किसी तरह का कोई वास्तविक खतरा नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

* जनवरी 2024 की घटना: कोटद्वार में एक मुस्लिम दुकानदार की दुकान का नाम ‘बाबा’ होने पर कुछ हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई थी।

* चर्चा में आए दीपक: पड़ोस में जिम ट्रेनर का काम करने वाले दीपक ने वहां पहुंचकर युवकों का विरोध किया था। इसी दौरान उन्होंने अपना नाम ‘मोहम्मद दीपक’ बताया था, जिसके बाद राहुल गांधी समेत कई बड़े नेताओं ने उनकी सराहना की थी।

* विवाद: बाद में दीपक के खिलाफ भी कानूनी मामला दर्ज हुआ, जिसे रद्द कराने और खुद के लिए सुरक्षा मांगने वह हाई कोर्ट पहुँचे थे।

“अपनी स्थिति याद रखें”

अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि याचिका दायर करते समय व्यक्ति को यह पता होना चाहिए कि उसकी स्थिति क्या है। इस मामले में याचिकाकर्ता की स्थिति एक संदिग्ध आरोपी की है, न कि किसी जांचकर्ता या शिकायतकर्ता की जो अधिकारियों पर सवाल उठाए।

अदालती रुख: जस्टिस थपलियाल ने यह भी चेतावनी दी कि वह याचिकाकर्ता पर भारी जुर्माना लगाकर इस याचिका को खारिज कर देंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *