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गर्भनिरोधक गोलियों और कैंसर के बीच संबंध: क्या है असल खतरा?

गर्भनिरोधक गोलियों और कैंसर के बीच संबंध: क्या है असल खतरा?

महिलाओं में गर्भनिरोधक गोलियां (Oral Contraceptives या Birth Control Pills) बहुत आम तरीका है परिवार नियोजन का, लेकिन सोशल मीडिया और कुछ खबरों में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या ये गोलियां कैंसर का कारण बनती हैं? खासकर ब्रेस्ट कैंसर का। आइए हाल की रिसर्च और विश्वसनीय अध्ययनों के आधार पर सच्चाई समझते हैं।

ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम थोड़ा बढ़ता है, लेकिन बहुत कम

हाल के बड़े अध्ययनों (जैसे स्वीडन में 20 लाख से ज्यादा महिलाओं पर 2025 की स्टडी) से पता चलता है कि हार्मोनल गर्भनिरोधक (कंबाइंड या प्रोजेस्टिन-ओनली पिल्स) इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का रिलेटिव रिस्क 20-24% तक बढ़ सकता है।

लेकिन यह रिलेटिव रिस्क है। असल में (absolute risk) यह बहुत छोटा होता है क्योंकि युवा महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर पहले से ही बहुत कम होता है। उदाहरण: इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में सालाना लगभग 13 अतिरिक्त मामले प्रति 1 लाख महिलाएं हो सकते हैं, यानी करीब 7,800-8,000 महिलाओं में 1 अतिरिक्त केस।

यह जोखिम मुख्य रूप से वर्तमान या हाल ही में इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में होता है। गोलियां बंद करने के 5-10 साल बाद यह रिस्क सामान्य स्तर पर वापस आ जाता है।

कुछ प्रोजेस्टिन (जैसे desogestrel) वाली गोलियों में रिस्क थोड़ा ज्यादा दिखा है, जबकि levonorgestrel या अन्य कुछ में कम।

अच्छी खबर: कुछ कैंसरों से बचाव भी करती हैं

गर्भनिरोधक गोलियां सिर्फ जोखिम नहीं बढ़ातीं, बल्कि कई कैंसरों से बचाती भी हैं:

एंडोमेट्रियल कैंसर (गर्भाशय की लाइनिंग का कैंसर) का रिस्क काफी कम हो जाता है – लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर 30-60% तक कमी।

ओवेरियन कैंसर (अंडाशय का कैंसर) का जोखिम भी घटता है, और जितने लंबे समय तक लें, उतना ज्यादा फायदा।

कुछ अध्ययनों में कोलोरेक्टल कैंसर का रिस्क भी कम दिखा है।

सर्वाइकल कैंसर पर क्या असर?

कुछ पुरानी रिसर्च में लंबे समय तक इस्तेमाल से सर्वाइकल कैंसर का हल्का जोखिम बढ़ने की बात कही गई है, लेकिन यह HPV इंफेक्शन से ज्यादा जुड़ा होता है। नियमित स्क्रीनिंग (Pap smear) से इसे कंट्रोल किया जा सकता है।

क्या करें महिलाएं?

अगर आप गर्भनिरोधक गोलियां ले रही हैं, तो घबराएं नहीं। ज्यादातर एक्सपर्ट्स (NCI, Cancer.org, ACOG) मानते हैं कि फायदे (प्रेग्नेंसी रोकना, पीरियड्स रेगुलर करना, एंडोमेट्रियोसिस में राहत आदि) जोखिम से ज्यादा हैं, खासकर युवा महिलाओं के लिए।

डॉक्टर से बात करें: अपनी फैमिली हिस्ट्री, उम्र और अन्य फैक्टर्स (जैसे स्मोकिंग) के आधार पर सबसे सही ऑप्शन चुनें।

नियमित जांच: ब्रेस्ट सेल्फ-एग्जाम, मैमोग्राफी (उम्र के अनुसार), और सर्वाइकल स्क्रीनिंग करवाते रहें।

अगर चिंता ज्यादा है, तो नॉन-हार्मोनल तरीके (कॉपर IUD, कंडोम आदि) पर विचार करें।

संक्षेप में, गर्भनिरोधक गोलियां कैंसर नहीं “करतीं”, लेकिन ब्रेस्ट कैंसर का मामूली और अस्थायी जोखिम बढ़ा सकती हैं, जबकि अन्य गंभीर कैंसरों से बचाती भी हैं। डॉक्टर की सलाह के बिना कभी बंद न करें और जानकारी के आधार पर फैसला लें। स्वस्थ रहें!

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