ईंधन संकट: कमर्शियल गैस सप्लाई ठप होने से होटल-रेस्टोरेंट बेहाल, तालाबंदी की कगार पर देशभर के किचन
ईंधन संकट: कमर्शियल गैस सप्लाई ठप होने से होटल-रेस्टोरेंट बेहाल, तालाबंदी की कगार पर देशभर के किचन
देश के प्रमुख शहरों में कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की आपूर्ति अचानक बाधित होने से होटल और रेस्टोरेंट उद्योग के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे युद्ध और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों के कारण भारत में नीले सिलेंडरों (19 किग्रा) की किल्लत पैदा हो गई है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे महानगरों में स्थिति गंभीर बनी हुई है, जहां रेस्टोरेंट मालिकों ने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटों में सप्लाई बहाल नहीं हुई, तो वे शटर गिराने पर मजबूर होंगे।
क्यों पैदा हुआ यह संकट?
विशेषज्ञों के अनुसार, इजरायल-ईरान संघर्ष के कारण लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख शिपिंग रूट प्रभावित हुए हैं। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। वर्तमान में कच्चे माल की कमी को देखते हुए तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने घरेलू गैस (14.2 किग्रा) की आपूर्ति को प्राथमिकता दी है, जिसके चलते कमर्शियल सिलेंडरों की डिलीवरी पर अघोषित रोक या भारी कटौती कर दी गई है।
प्रमुख शहरों का हाल
* बेंगलुरु: बेंगलुरु होटल्स एसोसिएशन ने ‘SOS’ जारी करते हुए बताया कि कई इलाकों में सप्लाई पूरी तरह बंद है। एसोसिएशन ने कुछ होटलों को अस्थाई रूप से बंद करने या केवल सीमित समय तक संचालन करने का सुझाव दिया है।
* मुंबई: मुंबई में लगभग 20% छोटे रेस्टोरेंट पहले ही प्रभावित हो चुके हैं। ‘आहार’ (AHAR) एसोसिएशन के मुताबिक, बुकिंग के बाद सिलेंडर मिलने में 2 से 8 दिन की देरी हो रही है।
* दिल्ली-NCR: राजधानी में 50,000 से अधिक भोजन इकाइयां प्रभावित हैं। कई ढाबों और छोटे होटलों ने कोयले या लकड़ी के चूल्हों का रुख करना शुरू कर दिया है।
* चेन्नई: यहाँ कई बड़े रेस्टोरेंट चेन्स के पास केवल 2 दिन का स्टॉक बचा है।
संकट के बड़े प्रभाव
* मेनू में कटौती: कई रेस्टोरेंट ने ईंधन बचाने के लिए अपने मेनू को छोटा कर दिया है। तंदूरी आइटम और ज्यादा समय लेने वाले व्यंजनों को फिलहाल लिस्ट से हटाया जा रहा है।
* कीमतों में उछाल: बाजार में सिलेंडरों की किल्लत के चलते कालाबाजारी की खबरें भी आ रही हैं, जिससे खाने की थाली महंगी होने के आसार हैं।
* रोजगार पर खतरा: होटल संगठनों का कहना है कि अगर किचन बंद हुए, तो लाखों वेटरों और रसोइयों की आजीविका पर संकट आ जाएगा।
“हम आखिरी सांस तक अपनी सेवाएं देना चाहते हैं, लेकिन बिना गैस के चूल्हा कैसे जलेगा? सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पूरी तरह ठप न हो जाए।” — होटल एसोसिएशन के एक पदाधिकारी
सरकार का रुख
पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्थिति का जायजा लेने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। सूत्रों के मुताबिक, घरेलू उपभोक्ताओं को किल्लत से बचाने के लिए कमर्शियल सप्लाई पर कुछ दिनों के लिए राशनिंग (Rationing) लागू की गई है। सरकार वैकल्पिक स्रोतों से गैस आयात करने की कोशिश कर रही है।
