अमेरिका ईरान के साथ चल रही लंबी जंग की तैयारी में तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने को तैयार… USS George H.W. Bush रवाना होने की कगार पर
अमेरिका ईरान के साथ चल रही लंबी जंग की तैयारी में तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने को तैयार… USS George H.W. Bush रवाना होने की कगार पर
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब खुले युद्ध में बदल चुका है, और अमेरिकी नौसेना अपनी ताकत को और बढ़ा रही है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका अब तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप क्षेत्र में भेजने की तैयारी कर रहा है। यह कैरियर USS George H.W. Bush (CVN-77) है, जो फिलहाल अमेरिकी तट के पास प्री-डिप्लॉयमेंट एक्सरसाइज पूरी कर चुका है और जल्द ही पूर्वी भूमध्य सागर की ओर रवाना हो सकता है।
फिलहाल क्षेत्र में दो अमेरिकी सुपरकैरियर्स पहले से तैनात हैं:
USS Abraham Lincoln (अरब सागर में ऑपरेशनल, ईरान के खिलाफ स्ट्राइक्स में शामिल)
USS Gerald R. Ford (दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर, जो अब रेड सी में पहुंच चुका है और Suez Canal से गुजरकर मिडिल ईस्ट पहुंचा है)
अगर USS George H.W. Bush का डिप्लॉयमेंट होता है, तो यह अमेरिकी नौसेना की तरफ से एक बड़ा ऐतिहासिक कदम होगा, क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर तीन न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर्स एक साथ मिडिल ईस्ट में कभी नहीं तैनात किए गए। फॉक्स न्यूज और USNI News जैसी रिपोर्ट्स में कहा गया है कि Bush ग्रुप जल्द ही अटलांटिक पार करके पूर्वी भूमध्य सागर पहुंच सकता है, जहां से यह ईरान के खिलाफ ऑपरेशन्स में सपोर्ट देगा।
यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस रणनीति का हिस्सा लगता है, जिसमें ईरान से “अनकंडीशनल सरेंडर” की मांग की जा रही है और लंबे समय तक चलने वाली “मेजर वेव्स” ऑफ अटैक्स की बात कही जा रही है। पिछले हफ्तों में अमेरिका ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर्स, ड्रोन शिप्स और कई जहाजों पर हमले किए हैं, जिसमें B-2 बॉम्बर्स और अन्य एसेट्स शामिल रहे हैं।
ईरान की तरफ से भी दावे किए जा रहे हैं कि उसने USS Abraham Lincoln पर मिसाइल और ड्रोन अटैक किए, लेकिन अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ऐसे दावों को खारिज किया है और कोई डैमेज नहीं होने की बात कही है।
यह डिप्लॉयमेंट अमेरिकी मिलिट्री की उस तैयारी को दिखाता है, जिसमें ईरान के साथ “लंबी और अंतिम लड़ाई” के लिए फुल स्केल तैयारी की जा रही है, ताकि क्षेत्र में ऑयल रूट्स सुरक्षित रहें और हूती अटैक्स जैसी चुनौतियों से निपटा जा सके।
स्थिति तेजी से बदल रही है, और अगले 10-12 दिनों में Bush के पहुंचने पर मिडिल ईस्ट में अमेरिकी फायरपावर और मजबूत हो जाएगी।
