धर्म

चैत्र अमावस्या को क्यों कहते हैं भूतड़ी अमावस्या? जानें इससे जुड़े 5 पावरफुल उपाय

चैत्र अमावस्या को क्यों कहते हैं भूतड़ी अमावस्या? जानें इससे जुड़े 5 पावरफुल उपाय

हिंदू पंचांग में हर महीने की अमावस्या तिथि विशेष महत्व रखती है, लेकिन चैत्र मास की अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या (Bhutadi Amavasya) कहा जाता है। यह नाम सुनकर लगता है कि इसका सीधा संबंध भूत-प्रेत से है, लेकिन असल में यह नकारात्मक शक्तियों, अतृप्त आत्माओं और प्रेत-बाधा से जुड़ा है।

भूतड़ी अमावस्या नाम क्यों पड़ा?

अमावस्या की रात अंधेरी होती है, चंद्रमा नहीं दिखता, जिससे तमो गुण (अंधकार, नकारात्मकता) प्रबल हो जाता है।

चैत्र मास में यह अमावस्या रजो और तमो गुण की अधिकता के कारण अतृप्त आत्माएं, भूत-प्रेत और नकारात्मक ऊर्जाएं ज्यादा सक्रिय मानी जाती हैं। ये अधूरी इच्छाओं वाली आत्माएं लोगों के आसपास घूम सकती हैं।

गरुड़ पुराण और अन्य शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन पितरों का तर्पण, श्राद्ध और नकारात्मक शक्तियों से बचाव के उपाय विशेष फलदायी होते हैं।

इसलिए इसे “भूतड़ी” (भूतों वाली) अमावस्या कहा जाता है – भूतों से डरने के लिए नहीं, बल्कि नकारात्मकता से रक्षा और पितरों की शांति के लिए।

यह तिथि पितृ दोष दूर करने, आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए बहुत शुभ मानी जाती है।

भूतड़ी अमावस्या से जुड़े 5 पावरफुल उपाय

ये उपाय ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नकारात्मक ऊर्जा, प्रेत-बाधा, पितृ दोष और जीवन की बाधाओं को दूर करते हैं:

पवित्र जल में स्नान (Holy Dip): सुबह सूर्योदय से पहले किसी पवित्र नदी, सरोवर या तीर्थ में स्नान करें। ऐसा करने से पाप नष्ट होते हैं और पुण्य प्राप्ति होती है। घर पर भी स्नान कर ॐ नमः शिवाय का जप करें।

हनुमान चालीसा का पाठ: भूतड़ी अमावस्या पर हनुमान जी की पूजा और हनुमान चालीसा का 7 या 11 बार पाठ करें। इससे भूत-प्रेत, नकारात्मक शक्तियां और डर दूर होते हैं। सिंदूर चढ़ाकर लाल फूल अर्पित करें।

पितरों का तर्पण और श्राद्ध: पितरों को तर्पण, पिंडदान और भोजन अर्पित करें। काले तिल, जौ, कुशा और जल से तर्पण करें। इससे पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं और पितृ दोष दूर होता है।

नवग्रह पूजा या सूर्य अर्घ्य: तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। नवग्रह मंत्र जप करें। इससे ग्रह दोष और नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।

दान और गरीबों को भोजन: ब्राह्मण, गरीब या जरूरतमंद को काले कपड़े, कंबल, जूते-चप्पल, काले तिल, उड़द दाल या भोजन दान करें। पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और मीठा अर्पित करें। इससे जीवन में सकारात्मकता आती है और बाधाएं दूर होती हैं।

ये उपाय सरल लेकिन बहुत प्रभावशाली हैं। इस दिन तामसिक भोजन, नशा, बाल-नाखून कटवाना या झगड़े से बचें।

भूतड़ी अमावस्या पर ये उपाय करके आप नकारात्मकता से मुक्ति पा सकते हैं और जीवन में शांति-समृद्धि ला सकते हैं। क्या आप इनमें से कोई उपाय करते हैं? कमेंट में बताएं!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *