हल्द्वानी: बनभूलपुरा से रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण हटेगा, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश—प्रभावित परिवार पीएम आवास योजना में आवेदन कर सकेंगे
हल्द्वानी: बनभूलपुरा से रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण हटेगा, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश—प्रभावित परिवार पीएम आवास योजना में आवेदन कर सकेंगे
सुप्रीम कोर्ट ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में रेलवे की लगभग 30 हेक्टेयर (करीब 74 एकड़) भूमि पर अतिक्रमण हटाने का आदेश दे दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले लोग उसी जगह पर रहने की मांग नहीं कर सकते, और रेलवे प्रोजेक्ट के लिए जमीन खाली कराई जाएगी। यह फैसला आज (24 फरवरी 2026) मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने सुनाया, जिसमें प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर भी निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु सुप्रीम कोर्ट के आदेश से:
रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाना होगा—यह रेलवे का अधिकार है कि वह जमीन का उपयोग कैसे करे।
प्रभावित परिवारों की पहचान की जाएगी और उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत मकान के लिए आवेदन करने का मौका मिलेगा।
रमजान के बाद 19 मार्च 2026 को आवेदन जमा करने के लिए विशेष कैंप लगाए जाएंगे, जहां लोग आवेदन कर सकेंगे।
कोर्ट ने कहा कि सरकारी जमीन पर बसे लोग पुनर्वास की मांग कर सकते हैं, लेकिन उसी जगह पर रहने का अधिकार नहीं है।
मामले का बैकग्राउंड:
यह विवाद 2007 से चल रहा है, जब उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था।
इलाके में गफूर बस्ती, ढोलक बस्ती और इंदिरा नगर जैसे इलाकों में रेलवे की जमीन पर करीब 3660-4365 अवैध मकान बने हुए हैं, जहां 5000+ परिवार (लगभग 30,000-50,000 लोग) रहते हैं।
फरवरी 2024 में अतिक्रमण हटाने की कोशिश के दौरान हिंसा हुई थी, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे। उसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले कई बार सुनवाई में स्टे दिया था और पुनर्वास पर जोर दिया था, लेकिन अब अंतिम फैसला आ गया है कि अतिक्रमण हटेगा।
स्थानीय प्रभाव और सुरक्षा:
फैसले के बाद हल्द्वानी में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है। बनभूलपुरा इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है, और ड्रोन से निगरानी की जा रही है।
प्रशासन ने कहा है कि फैसला शांतिपूर्ण तरीके से लागू किया जाएगा, और प्रभावित लोगों को सहायता मिलेगी।
रेलवे का कहना है कि यह जमीन महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट (जैसे रेलवे विस्तार या अन्य विकास) के लिए जरूरी है।
यह फैसला हजारों परिवारों के भविष्य को प्रभावित करेगा, लेकिन कोर्ट ने मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास का रास्ता दिया है। स्थानीय लोग और संगठन अब फैसले की कॉपी का इंतजार कर रहे हैं ताकि आगे की रणनीति बनाई जा सके। स्थिति पर नजर बनी हुई है।
