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मार्केट क्रैश: AI disruption और ट्रेड वॉर की आशंका से IT सेक्टर में बिकवाली का दौर

भारतीय शेयर बाजार में आज भारी बिकवाली का दौर देखा गया, जिससे प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में 1% से अधिक की गिरावट दर्ज हुई। IT सेक्टर में AI से जुड़ी चिंताओं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ धमकियों ने निवेशकों में दहशत फैला दी, जिससे बाजार में ‘क्रैश’ जैसी स्थिति बन गई।

बाजार के प्रमुख आंकड़े (क्लोजिंग बेल पर):

बीएसई सेंसेक्स: 1,068.74 अंकों की भारी गिरावट के साथ 82,225.92 पर बंद, यानी 1.28% नीचे।

एनएसई निफ्टी 50: 288.35 अंकों की गिरावट के साथ 25,424.65 पर बंद, यानी 1.12% नीचे।

निफ्टी आईटी इंडेक्स: सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, 4.74% टूटकर 30,053.50 पर बंद। यह इंडेक्स पिछले एक महीने में 20-21% से अधिक गिर चुका है और 30 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया।

IT सेक्टर में हाहाकार की वजहें:

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, गिरावट की मुख्य वजहें हैं:

AI disruption का बढ़ता खतरा — Anthropic की नई AI टूल्स (जैसे Claude Cowork Agent) और Citrini Research की रिपोर्ट ने भारतीय IT कंपनियों के पारंपरिक लेबर-आधारित मॉडल पर गहरा संकट मंडराने की चेतावनी दी। इससे TCS, Infosys, Wipro, HCL Tech और Tech Mahindra जैसे दिग्गज शेयरों में 3-7% तक की बिकवाली हुई। कई स्टॉक्स 52-वीक लो पर पहुंच गए।

ट्रंप की टैरिफ धमकी — अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने नए ग्लोबल टैरिफ की घोषणा की और ट्रेड डील्स से पीछे हटने वाले देशों को चेतावनी दी, जिससे ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बढ़ी।

ग्लोबल टेक रूट — अमेरिकी टेक शेयरों में कमजोरी का असर एशियाई बाजारों पर पड़ा, जिसमें भारतीय IT सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ।

निवेशकों का नुकसान: BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप आज करीब ₹5-5.16 लाख करोड़ तक घट गया। कुछ रिपोर्ट्स में कुल नुकसान ₹5-6 लाख करोड़ तक का अनुमान लगाया गया है।

सेक्टर-वाइज प्रदर्शन:

सबसे ज्यादा गिरावट: निफ्टी IT (-4.74%), रियल्टी (-2.54%)।

कुछ हरे निशान में: निफ्टी मेटल (+1.36%, नया ऑल-टाइम हाई), फार्मा और एनर्जी सेक्टर में हल्की तेजी।

ब्रॉडर मार्केट: निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप भी 0.3-0.55% नीचे बंद हुए।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि AI और टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताएं अगले कुछ दिनों में और दबाव डाल सकती हैं, लेकिन FIIs की हालिया खरीदारी से लॉन्ग-टर्म में रिकवरी की उम्मीद बनी हुई है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि घबराहट में फैसले न लें और फंडामेंटल्स पर फोकस करें।

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