अन्तर्राष्ट्रीय

रूसी खुफिया एजेंसी का बड़ा दावा: इन देशों पर यूक्रेन को न्यूक्लियर हथियार देने की साजिश का आरोप

रूस की विदेशी खुफिया एजेंसी एसवीआर (SVR) ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए ब्रिटेन और फ्रांस पर आरोप लगाया है कि वे यूक्रेन को न्यूक्लियर हथियार या उससे जुड़ी तकनीक देने की तैयारी कर रहे हैं। इस दावे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया है, खासकर तब जब रूस-यूक्रेन युद्ध की चौथी वर्षगांठ पर यह बयान आया है। एसवीआर का कहना है कि लंदन और पेरिस यूक्रेन को सबमरीन-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल और TN75 वॉरहेड जैसे न्यूक्लियर कंपोनेंट्स ट्रांसफर करने की योजना बना रहे हैं, ताकि कीव शांति वार्ता में मजबूत स्थिति हासिल कर सके।

एसवीआर के बयान में कहा गया है कि ब्रिटेन और फ्रांस का मानना है कि यूक्रेन की सेना अकेले रूस पर विजय नहीं पा सकती, इसलिए न्यूक्लियर हथियार या ‘डर्टी बॉम्ब’ देकर वे स्थिति बदलना चाहते हैं। एजेंसी ने यह भी दावा किया कि जर्मनी ने इस ‘खतरनाक योजना’ में शामिल होने से इनकार कर दिया है। हालांकि, रूस ने इस दावे के लिए कोई ठोस सबूत नहीं पेश किया है।

इस दावे पर रूस के पूर्व राष्ट्रपति और सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ब्रिटेन या फ्रांस ने यूक्रेन को न्यूक्लियर तकनीक दी, तो रूस को टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियारों का इस्तेमाल करने पर मजबूर होना पड़ेगा, जो यूक्रेन, ब्रिटेन और फ्रांस पर हमले का कारण बन सकता है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भी इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह न्यूक्लियर अप्रसार संधि को खतरे में डाल सकता है और रूस की वार्ता स्थिति पर असर डालेगा।

दूसरी ओर, यूक्रेन और पश्चिमी देशों ने इन आरोपों को बेबुनियाद और ‘गंदी सूचना बम’ करार दिया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के कार्यालय ने दावे को ‘बेतुका’ बताते हुए खारिज कर दिया। ब्रिटेन सरकार ने कहा कि इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है और वे यूक्रेन को सिर्फ रक्षात्मक सहायता दे रहे हैं। फ्रांस ने भी आरोपों को नकारा है।

यह दावा ऐसे समय में आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध चार साल पूरे कर चुका है और शांति वार्ताओं की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रूसी प्रोपगैंडा का हिस्सा हो सकता है, जो युद्ध को बढ़ाने या पश्चिमी समर्थन को कमजोर करने का प्रयास है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने न्यूक्लियर खतरे की चेतावनी पर चिंता जताई है और अप्रसार व्यवस्था की रक्षा की अपील की है।

मुख्य बिंदु:

एसवीआर का दावा: ब्रिटेन और फ्रांस यूक्रेन को न्यूक्लियर हथियार देने की तैयारी में।

मेदवेदेव की चेतावनी: टैक्टिकल न्यूक्लियर हमले की धमकी।

पश्चिमी प्रतिक्रिया: आरोपों को बेबुनियाद बताया।

प्रभाव: न्यूक्लियर अप्रसार पर खतरा, युद्ध में नया मोड़।

यह घटना वैश्विक सुरक्षा पर नए सवाल खड़े कर रही है और आगे की जांच व प्रतिक्रियाओं पर नजर रहेगी।

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