गैरसैंण विधानसभा का दर्दनाक आंकड़ा: 12 साल में केवल 10 सत्र, 35 दिन सदन चला
देहरादून/गैरसैंण: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैंण) स्थित विधानसभा भवन में पिछले 12 सालों (2014 से अब तक) में विधानसभा की कार्यवाही बेहद कम हुई है। आंकड़ों के अनुसार, यहां कुल केवल 10 सत्र ही आयोजित हुए, और सदन की कार्यवाही कुल 35 दिन ही चली। यह आंकड़ा भराड़ीसैंण को पूर्ण राजधानी बनाने की मांग के बीच उठाए जा रहे सवालों को और मजबूत करता है।
साल-दर-साल कार्यवाही के आंकड़े (ETV Bharat और अन्य रिपोर्ट्स के अनुसार)
2014: पहला सत्र (3 दिन)
2016: एक सत्र (2 दिन)
2017-2019: कुछ छोटे सत्र (कुल 8-10 दिन अनुमानित)
2020-2022: COVID और अन्य कारणों से बहुत कम या कोई सत्र नहीं
2023: बजट सत्र (कुछ दिन)
2024-2025: सीमित सत्र (कुल मिलाकर 35 दिन तक पहुंचा)
कुल: 10 सत्र, 35 कार्य दिवस (कांग्रेस सरकार में 3 बार, बीजेपी सरकार में 6-7 बार सत्र हुए)
मुख्य बिंदु
भराड़ीसैंण विधानसभा भवन 2014 में बनकर तैयार हुआ था, लेकिन अधिकांश सत्र देहरादून में ही होते रहे।
गैरसैंण को 2020 में ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया, लेकिन व्यावहारिक रूप से सदन की कार्यवाही यहां बहुत कम हुई।
हाल ही में (2026) सरकार ने 9 से 13 मार्च तक बजट सत्र यहां आयोजित करने का फैसला लिया है, जो 5 दिन का होगा—यह पिछले रिकॉर्ड से अलग नहीं।
विपक्ष (कांग्रेस) ने सरकार पर सवाल उठाए हैं कि करोड़ों खर्च कर भवन बनाया गया, लेकिन उपयोग न्यूनतम। कांग्रेस ने मांग की है कि बजट सत्र कम से कम 21 दिन का हो।
स्थानीय लोग और राजनीतिक दल इसे “राजधानी की बेरुखी” बता रहे हैं—खर्च करोड़ों में, कार्यवाही सिर्फ 35 दिन।
यह आंकड़े गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की बहस को फिर गरमा रहे हैं। आगामी बजट सत्र (9-13 मार्च 2026) में क्या रिकॉर्ड टूटता है या नहीं, यह देखना होगा।
