राजनीति

फीडबैक या डैमेज कंट्रोल? यूपी में भागवत की ताबड़तोड़ बैठकें, क्या है असली मकसद

फीडबैक या डैमेज कंट्रोल? यूपी में भागवत की ताबड़तोड़ बैठकें, क्या है असली मकसद

लखनऊ: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत इन दिनों उत्तर प्रदेश में लगातार बैठकें कर रहे हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। क्या यह संगठन की शताब्दी वर्ष की आउटरीच का हिस्सा है, जहां फीडबैक लिया जा रहा है? या फिर 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले डैमेज कंट्रोल की कोशिश, जहां हिंदू एकता और जनसंख्या जैसे मुद्दों पर जोर देकर आधार मजबूत किया जा रहा है? भागवत का 17-18 फरवरी को लखनऊ दौरा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात ने इन सवालों को और हवा दी है।f525cc2b51d4

बैठकें और मुख्य बिंदु

दो दिवसीय लखनऊ दौरा (17-18 फरवरी 2026): भागवत ने सरस्वती शिशु मंदिर में ‘समाजिक सद्भाव बैठक’ को संबोधित किया, जहां उन्होंने हिंदू समाज को एकजुट करने, जातियों को संघर्ष का कारण न बनने देने और कानून का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने कहा, “हिंदू समाज को संगठित और सशक्त बनाने की जरूरत है। हमें किसी से खतरा नहीं, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है।”9c737564c9ff

युवा संवाद और बुद्धिजीवी बैठक: 18 फरवरी को लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय ऑडिटोरियम में ‘शोधार्थी संवाद’ कार्यक्रम में भागवत ने अमेरिका और चीन पर निशाना साधा, उन्हें ‘फंडामेंटलिज्म फैलाने वाला’ बताया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया और कहा कि भारत वैश्विक दक्षिण का नेतृत्व करेगा। इसके अलावा, प्रोफेशनल्स के साथ आउटरीच इवेंट में ‘सज्जन शक्ति’ को संघ की शाखाओं में शामिल होने का आह्वान किया।ba67825a1b18

जनसंख्या और हिंदू एकता पर फोकस: भागवत ने हिंदू परिवारों से कम से कम तीन बच्चे पैदा करने की अपील की, ताकि हिंदू जनसंख्या में गिरावट रोकी जा सके। उन्होंने घुसपैठियों को ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ करने की बात कही और कहा कि भारतीय मुसलमान भी मूल रूप से हिंदू हैं, जिन्हें धीरे-धीरे वापस जोड़ा जाना चाहिए।af43a3a41ed9a8a62d

योगी से मुलाकात: यह तीन महीनों में दूसरी मुलाकात है। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में 2027 यूपी चुनावों की रणनीति पर चर्चा हुई, जिसमें हिंदुत्व एजेंडे को मजबूत करना शामिल है। 2026 में हिंदुत्व संगठनों और संतों की बड़ी कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का प्रस्ताव भी आया।a408d2ca0fc215bf31

पृष्ठभूमि: शताब्दी वर्ष और राजनीतिक संदर्भ

आरएसएस अपनी स्थापना के 100 साल पूरे होने पर देशभर में आउटरीच प्रोग्राम चला रहा है। भागवत का यूपी दौरा इसी का हिस्सा है, लेकिन टाइमिंग महत्वपूर्ण है—2027 चुनाव नजदीक हैं और बीजेपी-आरएसएस के बीच संबंधों पर सवाल उठते रहे हैं। भागवत ने साफ कहा कि आरएसएस बीजेपी को नियंत्रित नहीं करता, जो पुरानी अफवाहों का खंडन लगता है।9f297f हाल के महीनों में आरएसएस ने हिंदू एकीकरण पर जोर बढ़ाया है, खासकर राम मंदिर उद्घाटन के बाद।4e63a7 राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फीडबैक लेने का तरीका है, जहां ग्राउंड लेवल पर समाज की नब्ज टटोली जा रही है, लेकिन कुछ इसे डैमेज कंट्रोल के रूप में देखते हैं—विशेषकर जातीय संघर्ष और जनसंख्या जैसे संवेदनशील मुद्दों पर, जो विपक्ष उठा सकता है।

वर्तमान स्थिति और प्रतिक्रियाएं

भागवत की बैठकें आरएसएस की हिंदू समाज को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा लगती हैं, लेकिन चुनावी संदर्भ में इसे डैमेज कंट्रोल के रूप में भी देखा जा रहा है। विपक्षी दलों ने इसे ‘राजनीतिक हस्तक्षेप’ बताया है, जबकि बीजेपी ने इसे सामाजिक सद्भाव की पहल करार दिया। आने वाले दिनों में और बैठकें हो सकती हैं, क्योंकि भागवत का प्रांतीय दौरा जारी है। यूपी की राजनीति पर इसका असर 2027 चुनावों में दिख सकता है।

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