Saturday, September 12, 2026
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अजित पवार के निधन के बाद राजकीय शोक के दौरान धड़ल्ले से जारी हुए सर्टिफिकेट, CM फडणवीस ने बैठाई जांच

मुंबई, 16 फरवरी 2026: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के तुरंत बाद उनके विभाग में अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाणपत्रों के बड़े पैमाने पर जारी होने का मामला सामने आया है, जिस पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त कार्रवाई करते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं।

28 जनवरी 2026 को बारामती में विमान दुर्घटना में अजित पवार सहित पांच लोगों की मौत हो गई थी। राज्य सरकार ने उनके सम्मान में तीन दिनों का राजकीय शोक घोषित किया था, जिसमें सरकारी कार्यालय बंद रहे और अन्य प्रोटोकॉल लागू थे। लेकिन इसी दौरान अल्पसंख्यक विकास विभाग (जो अजित पवार के पास था) में कथित तौर पर धड़ल्ले से काम हुआ।

रिपोर्टों के मुताबिक, 28 जनवरी से 30-31 जनवरी तक यानी शोक की अवधि में करीब 20 संस्थाओं की 75 शैक्षणिक संस्थाओं (मुख्य रूप से स्कूलों) को अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए। कुछ स्रोतों में दावा किया गया है कि इनमें से कई फाइलों पर फर्जी या पोस्टमॉर्टम हस्ताक्षर (मृत्यु के बाद की मंजूरी) का इस्तेमाल हुआ, क्योंकि अजित पवार की मौत के बाद उनके नाम से कोई मंजूरी संभव नहीं थी।

विपक्षी दलों, युवक कांग्रेस और अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे “शोक के बीच की अनुचितता” और “संभावित घोटाला” करार दिया। आरोप है कि पहले से लंबित फाइलों को अचानक तेजी से क्लियर किया गया, जबकि पिछले साल अक्टूबर में ही इस प्रक्रिया पर स्थगिती लगाई गई थी।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इन सभी 75 मंजूरियों पर तत्काल रोक लगा दी है। उन्होंने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। फडणवीस ने कहा कि शोक के माहौल में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

यह घटना अजित पवार के निधन के बाद राज्य में उठने वाले पहले बड़े प्रशासनिक विवादों में से एक है। जांच पूरी होने पर दोषियों पर कार्रवाई और आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर तीखी बहस जारी है।

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