नसीमुद्दीन सिद्दीकी सपा में शामिल! अखिलेश यादव ने दिलाई सदस्यता, कांग्रेस को बड़ा झटका
नसीमुद्दीन सिद्दीकी सपा में शामिल! अखिलेश यादव ने दिलाई सदस्यता, कांग्रेस को बड़ा झटका
नई दिल्ली/लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में बड़ा उलटफेर! पूर्व मंत्री और कद्दावर मुस्लिम नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने रविवार (15 फरवरी 2026) को समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। सपा मुख्यालय लखनऊ में अखिलेश यादव ने खुद उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। उनके साथ कई अन्य नेता भी सपा में शामिल हुए, जिससे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी समीकरणों में हलचल मच गई है।
क्या हुआ आज?
कांग्रेस से हाल ही में इस्तीफा देने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अखिलेश यादव की मौजूदगी में साइकिल थाम ली।
अखिलेश ने उन्हें माला पहनाकर स्वागत किया और स्मृति चिह्न के साथ अहिल्याबाई की तस्वीर भेंट की।
नसीमुद्दीन ने कहा, “मैं नेताजी (मुलायम सिंह यादव) से हमेशा प्रभावित रहा हूं। अखिलेश यादव का बहुत सम्मान करता हूं और पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करूंगा।”
उनके साथ उनकी पत्नी भी सपा में शामिल हुईं।
कौन हैं नसीमुद्दीन सिद्दीकी?
राजनीतिक करियर की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी (BSP) से की, कांशीराम के समय से जुड़े रहे।
मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे, BSP के प्रमुख मुस्लिम चेहरे माने जाते थे।
2017 में मायावती ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था, उसके बाद कांग्रेस में शामिल हुए थे।
कांग्रेस में भी सक्रिय रहे, लेकिन हाल ही में इस्तीफा दे दिया।
आज के ज्वाइनिंग में और कौन शामिल हुए?
अपना दल (एस) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार पाल।
बसपा पृष्ठभूमि के अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू।
पूर्व विधायक दीनानाथ कुशवाहा (देवरिया)।
पूर्व विधानसभा प्रत्याशी डॉ. दानिश खान (AIMIM से जुड़े रहे)।
तीन महिला नेताओं समेत कुल सात-आठ नेता और कार्यकर्ता।
यह सामूहिक ज्वाइनिंग कांग्रेस और बसपा दोनों को झटका मानी जा रही है। सपा अब PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को और मजबूत करने की तैयारी में लगी है, और मुस्लिम वोट बैंक में सिद्दीकी की एंट्री से फायदा मिल सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
2027 UP विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, और अखिलेश यादव लगातार अपने कुनबे का विस्तार कर रहे हैं। कांग्रेस से आए सिद्दीकी जैसे अनुभवी नेता सपा की रणनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
फिलहाल सपा में खुशी का माहौल है, जबकि कांग्रेस के लिए यह बड़ा नुकसान! क्या आपको लगता है कि यह ज्वाइनिंग 2027 में सपा को फायदा पहुंचाएगी? कमेंट में बताएं!
