शंकराचार्य विवाद पर योगी-अखिलेश की जुबानी जंग: अखिलेश ने CM योगी के बयान को ‘शाब्दिक हिंसा’ और ‘पाप’ बताया
शंकराचार्य विवाद पर योगी-अखिलेश की जुबानी जंग: अखिलेश ने CM योगी के बयान को ‘शाब्दिक हिंसा’ और ‘पाप’ बताया
उत्तर प्रदेश में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। यह विवाद प्रयागराज के माघ मेले (Magh Mela) के दौरान शुरू हुआ, जब 18 जनवरी (मौनी अमावस्या) को शंकराचार्य को संगम स्नान के लिए पालकी से जाने से रोका गया, जिससे पुलिस और उनके समर्थकों के बीच तनाव हुआ। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि पुलिस ने संतों, बटुकों और महिलाओं के साथ मारपीट की।
CM योगी आदित्यनाथ का विधानसभा बयान (13 फरवरी 2026)
बजट सत्र के दौरान विधानसभा में CM योगी ने पहली बार इस मुद्दे पर खुलकर बोला:
“हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता। हर व्यक्ति हर पीठ का आचार्य बनकर घूम नहीं सकता और जहां जाए वहां माहौल खराब नहीं कर सकता।”
आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि शंकराचार्य बनने के लिए विद्वत परिषद द्वारा अनुमोदन, अभिषेक और परंपरा जरूरी है।
“कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। हम संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े हैं, हर नागरिक को कानून का सम्मान करना चाहिए।”
4.5 करोड़ श्रद्धालुओं के बीच निकास द्वार से अनधिकृत प्रवेश से भगदड़ का खतरा बताया।
विपक्ष (सपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर वे शंकराचार्य का सम्मान करते हैं तो 2015 में SP सरकार में उन पर लाठीचार्ज और FIR क्यों हुई?
अखिलेश यादव की तीखी प्रतिक्रिया (X पोस्ट और बयान)
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने CM योगी के बयान को “घोर अपमानजनक” बताते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया:
“पहन ले कोई जैसे भी ‘चोले’ पर उसकी वाणी पोल खोले। परम पूज्य शंकराचार्य जी के बारे में घोर अपमानजनक अपशब्द बोलना, शाब्दिक हिंसा है और पाप भी।”
चापलूसों पर भी निशाना: “ऐसा कहने वाले के साथ-साथ उनको भी पाप पड़ेगा जिन्होंने चापलूसी में मेजें थपथपाई हैं।”
“जब भाजपा के विधायक सदन के बाहर जाएंगे और जनता का सामना करेंगे तो जनता सड़क पर उनका सदन लगा देगी।”
महाकुंभ मौतों, मुआवजे भ्रष्टाचार, मुकदमे हटवाने पर सवाल उठाए और कहा कि ऐसे लोग “धर्म-पद” पर सवाल नहीं उठा सकते।
“अहंकार संस्कार को विकार में बदल देता है… जब मुंह खोला, तब बुरा बोला!”
विवादित फिल्म का जिक्र कर कहा कि अगले चुनाव में समाज एक-एक वोट से जवाब देगा और नई सरकार बनाएगा।
बयान को “निंदनीय” बताते हुए कहा कि निंदनीय शब्द भी छोटा पड़ जाएगा।
यह विवाद अब धार्मिक परंपरा, कानून व्यवस्था और सनातन धर्म की राजनीति में बदल गया है। शंकराचार्य ने भी योगी पर पलटवार किया, कहा कि उनका पद रिश्तेदारी से नहीं मिला और सरकार ब्राह्मणों को टारगेट कर रही है। Sपा इसे ब्राह्मण-संस्कृति पर हमला बताकर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश में है, जबकि BJP इसे कानून का राज और मर्यादा का मुद्दा बता रही है।
अगले चुनावों से पहले UP की सियासत में यह नया मुद्दा गरमाहट ला सकता है!
