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पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से पहली मौत: जानें क्या है यह घातक वायरस और क्यों है इतना खतरनाक

पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से पहली मौत: जानें क्या है यह घातक वायरस और क्यों है इतना खतरनाक

कोलकाता/नई दिल्ली, 12 फरवरी 2026: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बारासात स्थित एक निजी अस्पताल में निपाह वायरस से संक्रमित 25 वर्षीय महिला नर्स की मौत हो गई है। राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह हाल के वर्षों में पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से जुड़ी पहली मौत है। महिला नर्स जनवरी 2026 में सामने आए दो संक्रमण मामलों में से एक थीं। वह लंबे समय से वेंटिलेटर पर थीं, हाल ही में उनका टेस्ट नेगेटिव आया था, लेकिन जटिलताओं (द्वितीयक फेफड़े संक्रमण और अन्य) के कारण आज शाम कार्डियक अरेस्ट से उनकी मौत हो गई।

दूसरे संक्रमित नर्स (पुरुष) ठीक हो चुके हैं और डिस्चार्ज हो गए। स्वास्थ्य मंत्रालय और WHO ने स्थिति को नियंत्रित बताया है, लेकिन निपाह के खतरे को लेकर अलर्ट जारी है। जनवरी में ही भारत में दो मामले सामने आए थे, जबकि बांग्लादेश में भी एक मौत हुई। WHO ने कहा कि फैलाव का जोखिम कम है, लेकिन सतर्कता जरूरी है।

निपाह वायरस क्या है?

निपाह वायरस (Nipah Virus – NiV) एक जूनोटिक वायरस है, जो जानवरों (खासकर फ्रूट बैट्स) से इंसानों में फैलता है। यह हेनिपावायरस परिवार का सदस्य है। पहली बार 1998-99 में मलेशिया में सामने आया था (नाम मलेशिया के ‘सुंगाई निपाह’ गांव से लिया गया)। भारत में सबसे ज्यादा केस केरल और पश्चिम बंगाल में देखे गए हैं।

प्राकृतिक मेजबान: फ्रूट बैट्स (Pteropodidae परिवार के चमगादड़), जो वायरस को बिना बीमार हुए कैरी करते हैं।

भारत में इतिहास: 2001 से अब तक कई आउटब्रेक, खासकर केरल (2018, 2021, 2023) और पश्चिम बंगाल में। 2026 में यह नया क्लस्टर है।

कैसे फैलता है निपाह वायरस?

प्राथमिक संक्रमण: संक्रमित फ्रूट बैट्स के कच्चे खजूर के रस (ताड़ी/डेट पाम सैप) से, या बैट्स के मूत्र/लार/सलाद से दूषित फल खाने से।

इंसान से इंसान: निकट संपर्क से – शारीरिक तरल पदार्थ (लार, नाक/गले का स्राव, मूत्र), खासकर अस्पताल में बिना PPE के मरीजों की देखभाल करते समय। यह हवाई नहीं है, लेकिन ड्रॉपलेट्स से शॉर्ट रेंज में फैल सकता है।

अन्य: संक्रमित सुअरों (मलेशिया आउटब्रेक में) या अन्य जानवरों से भी।

लक्षण क्या हैं?

इन्क्यूबेशन पीरियड: 4-14 दिन (कभी-कभी 45 दिन तक)।

शुरुआती: बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, खांसी, उल्टी, थकान।

गंभीर: मस्तिष्क सूजन (एन्सेफलाइटिस) – भ्रम, सुस्ती, दौरा, कोमा।

श्वसन समस्या: निमोनिया, सांस लेने में तकलीफ।

कुछ मामलों में कोई लक्षण नहीं, लेकिन ज्यादातर गंभीर।

क्यों है इतना जानलेवा?

मृत्यु दर (Case Fatality Rate): 40% से 75% तक (WHO के अनुसार)। पिछले आउटब्रेक में 70-100% तक पहुंची।

कारण: कोई स्पेसिफिक एंटीवायरल दवा या वैक्सीन नहीं है। इलाज सिर्फ सपोर्टिव केयर (रेस्ट, हाइड्रेशन, वेंटिलेशन, दौरा कंट्रोल)।

जटिलताएं: एन्सेफलाइटिस से न्यूरोलॉजिकल डैमेज, सेकेंडरी इंफेक्शन, ऑर्गन फेलियर।

सर्वाइवर्स में 20% तक स्थायी न्यूरोलॉजिकल समस्या (सुनने/देखने में कमी, याददाश्त की समस्या)।

इलाज और रोकथाम

इलाज: कोई स्पेसिफिक ट्रीटमेंट नहीं। सपोर्टिव केयर – ICU, वेंटिलेटर, एंटीबायोटिक्स (सेकेंडरी इंफेक्शन के लिए), दर्द निवारक। कुछ एक्सपेरिमेंटल एंटीवायरल (जैसे रेमडेसिविर) ट्रायल में हैं, लेकिन अभी अप्रूव्ड नहीं।

रोकथाम:

कच्चा खजूर का रस न पिएं, फल अच्छे से धोएं।

बैट्स वाले इलाकों में सावधानी।

अस्पताल में PPE (मास्क, ग्लव्स) का इस्तेमाल।

संक्रमितों से दूरी, संपर्क ट्रेसिंग।

WHO ने इसे प्राथमिकता वाला पैथोजन माना है, वैक्सीन डेवलपमेंट चल रहा है।

यह वायरस दुर्लभ है, लेकिन फैलने पर बहुत घातक। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दी डायग्नोसिस और आइसोलेशन से फैलाव रोका जा सकता है। पश्चिम बंगाल में अब सतर्कता बढ़ा दी गई है, और संपर्कों की निगरानी हो रही है। अगर आपको फ्लू जैसे लक्षण हैं और हाल में प्रभावित इलाके से संपर्क था, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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