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सूर्य के रौद्र रूप से भारत खतरे में: ISRO ने भीषण रेडियो ब्लैकआउट की चेतावनी जारी की, जानिए क्या है वजह और असर

सूर्य के रौद्र रूप से भारत खतरे में: ISRO ने भीषण रेडियो ब्लैकआउट की चेतावनी जारी की, जानिए क्या है वजह और असर

नई दिल्ली: सूर्य इन दिनों बेहद उग्र रूप में है। फरवरी 2026 की शुरुआत से ही सूर्य ने लगातार शक्तिशाली सोलर फ्लेयर्स (सौर लपटें) छोड़ी हैं, जिससे भारत सहित पूरी दुनिया में स्पेस वेदर अलर्ट जारी हो गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि मजबूत रेडियो ब्लैकआउट की संभावना बहुत अधिक है। ISRO के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (ISTRAC) के डायरेक्टर अनिल कुमार ने NDTV को बताया, “रेडियो ब्लैकआउट की मजबूत संभावना है। हम अपने सभी सैटेलाइट्स की निगरानी बहुत करीब से कर रहे हैं। कोई भी कम्युनिकेशन लॉस होने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।”

क्या हुआ है?

1 फरवरी 2026 से सूर्य के एक्टिव रीजन (जैसे AR 14366 या AR 4341) से M-क्लास और X-क्लास सोलर फ्लेयर्स निकल रहे हैं। सबसे शक्तिशाली X8.1 या X8.3 क्लास फ्लेयर 1 फरवरी को रात 11:57 बजे UT (भारतीय समयानुसार 5 फरवरी सुबह) आया, जो 2026 का अब तक का सबसे ताकतवर फ्लेयर है। NASA के सोलर डायनामिक्स ऑब्जर्वेटरी ने इसकी इमेज कैप्चर की। ये फ्लेयर्स सूर्य की सतह से निकलकर पृथ्वी की आयनोस्फीयर (ionosphere) को प्रभावित करते हैं, जहां हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो वेव्स अवशोषित हो जाती हैं।

भारत पर क्या असर?

रेडियो ब्लैकआउट: HF (हाई फ्रीक्वेंसी) रेडियो कम्युनिकेशन प्रभावित, खासकर एविएशन, मैरीटाइम और दूरदराज इलाकों में। एयरलाइंस की कम्युनिकेशन में रुकावट आ सकती है।

सैटेलाइट्स: ISRO के 50+ ऑपरेशनल सैटेलाइट्स (जैसे INSAT, GSAT, IRNSS) पर खतरा। कम्युनिकेशन, नेविगेशन (GPS), टीवी सिग्नल, रडार प्रभावित हो सकते हैं।

पावर ग्रिड: कुछ रिपोर्ट्स में पावर ब्लैकआउट या ग्रिड फेलियर की आशंका जताई गई है, हालांकि मुख्य खतरा रेडियो और सैटेलाइट से जुड़ा है।

मानव स्वास्थ्य: जमीन पर रहने वालों को कोई सीधा खतरा नहीं, लेकिन हाई अल्टीट्यूड फ्लाइट्स में रेडिएशन बढ़ सकता है।

ISRO ने ग्राउंड स्टेशन्स को अलर्ट जारी किया है और कंटिंजेंसी प्लान तैयार रखा है। NASA और अन्य एजेंसियां भी मॉनिटरिंग कर रही हैं। यह सोलर साइकल 25 के पीक फेज में हो रहा है, जहां सूर्य की एक्टिविटी अधिकतम होती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में और फ्लेयर्स आ सकते हैं, इसलिए सतर्कता बरतनी जरूरी है।

ISRO ने लोगों से घबराने की बजाय अपडेट्स फॉलो करने की सलाह दी है।

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