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खेत-खलिहान: बजट में कृषि को ग्लोबल ब्रांड बनाने का बड़ा प्लान, हाई-वैल्यू फसलों और AI पर फोकस

खेत-खलिहान: बजट में कृषि को ग्लोबल ब्रांड बनाने का बड़ा प्लान, हाई-वैल्यू फसलों और AI पर फोकस

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संघ बजट 2026-27 में कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने और किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। बजट में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए ₹1,62,671 करोड़ आवंटित किए गए, जो पिछले साल के संशोधित अनुमान से 7.12% अधिक है। फोकस पारंपरिक फसलों से हटकर हाई-वैल्यू एग्रीकल्चर, पशुपालन, मत्स्य पालन और टेक्नोलॉजी पर रहा, ताकि खेती को ग्लोबल ब्रांड बनाया जा सके।

मुख्य घोषणाएं किसानों के लिए

हाई-वैल्यू फसलों पर जोर: तटीय इलाकों में नारियल, काजू, कोको और चंदन जैसी फसलों को बढ़ावा। कोकोनट प्रमोशन स्कीम से पुराने बागानों का नवीनीकरण, जिससे 1 करोड़ किसानों और कुल 3 करोड़ लोगों को फायदा। काजू और कोको को 2030 तक प्रीमियम ग्लोबल ब्रांड बनाने का लक्ष्य।

पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में: बादाम, अखरोट, पाइन नट्स और अगर की उच्च घनत्व खेती को सपोर्ट। पुराने कम-उपज वाले बागानों का पुनरुद्धार और वैल्यू एडिशन पर फोकस।

मत्स्य पालन को बूस्ट: 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास। तटीय क्षेत्रों में वैल्यू चेन मजबूत करने के लिए स्टार्टअप्स, महिला समूहों और फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशंस से बाजार लिंकेज।

पशुपालन और डेयरी: ग्रामीण-परि-शहरी क्षेत्रों में रोजगार के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी प्रोग्राम। लाइवस्टॉक, डेयरी और पोल्ट्री एंटरप्राइजेज का मॉडर्नाइजेशन, इंटीग्रेटेड वैल्यू चेन और लाइवस्टॉक FPOs को प्रोत्साहन।

टेक्नोलॉजी और AI: भारत विस्तार (Bharat Vistar) नाम से बहुभाषी AI टूल लॉन्च, जो AgriStack पोर्टल्स और ICAR पैकेज को इंटीग्रेट करेगा। किसानों को क्षेत्रीय भाषाओं में फसल सलाह, मौसम अलर्ट, कीट प्रबंधन, बाजार जानकारी और जोखिम कम करने वाली कस्टमाइज्ड एडवाइजरी मिलेगी। इससे उत्पादकता बढ़ेगी और निर्णय लेना आसान होगा।

ये ऐलान छोटे-मझोले किसानों, युवाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर केंद्रित हैं। सरकार का लक्ष्य है कि खेती को डायवर्सिफाई कर आय बढ़ाई जाए और भारत को कृषि निर्यात में ग्लोबल लीडर बनाया जाए। एक्सपर्ट्स इसे लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबल ग्रोथ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं, हालांकि कुछ किसान संगठनों ने MSP और लागत कम करने पर ज्यादा फोकस की मांग की है।

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