बजट 2026 से कार बाजार में नई रफ्तार की उम्मीद! EV इंसेंटिव, जीएसटी राहत और डिमांड बूस्ट पर टिकी नजरें
केंद्रीय बजट 2026 से कार बाजार में नई जान फूंकने की उम्मीदें चरम पर हैं। पिछले साल सितंबर 2025 में लागू हुए जीएसटी 2.0 सुधारों ने ऑटो सेक्टर को जबरदस्त बूस्ट दिया था। कंपनियों ने छूट का फायदा उठाते हुए कारों और बाइक्स की कीमतें घटाईं, जिससे त्योहारी सीजन में बिक्री में उछाल आया और कई शहरों में रिकॉर्ड बिक्री हुई। छोटी कारों पर जीएसटी 18% और बड़ी कारों पर 28% (बिना सेस के) हो गया, जिससे ग्राहकों को हजारों से लाखों रुपये तक की बचत हुई।
अब 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट पेश करने से पहले ऑटो इंडस्ट्री की नजरें इन प्रमुख फैसलों पर टिकी हैं:
ईवी और हाइब्रिड वाहनों पर ज्यादा राहत — फिलहाल ईवी पर 5% जीएसटी है, लेकिन चार्जिंग सर्विस और स्पेयर पार्ट्स पर 18% लगता है। इंडस्ट्री इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर खत्म करने और चार्जिंग पर जीएसटी 5% करने की मांग कर रही है ताकि ईवी सस्ती और आकर्षक बने।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा — ज्यादा फंडिंग और हाई-स्पीड चार्जिंग स्टेशनों के लिए प्रोत्साहन की उम्मीद।
स्क्रैपेज पॉलिसी में सुधार — पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने पर ज्यादा छूट और जीएसटी-लिंक्ड इंसेंटिव से नई गाड़ियों की डिमांड बढ़ेगी।
स्थिर और लंबी अवधि की नीतियां — सेक्टर चाहता है कि टैक्स और इंसेंटिव में बार-बार बदलाव न हो, ताकि प्लानिंग आसान रहे और निवेश बढ़े।
रूरल और एंट्री-लेवल सेगमेंट पर फोकस — ग्रामीण इलाकों में डिमांड बढ़ाने के लिए फाइनेंसिंग में सब्सिडी या इंटरेस्ट रेट कम करने जैसे कदम।
ऑटो कंपनियां और एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर बजट में इनमें से कुछ प्रमुख मांगें पूरी हुईं, तो कार बाजार में रिकवरी और तेज होगी, खासकर इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड सेगमेंट में। पिछले जीएसटी छूट के बाद जहां बाजार ‘मालामाल’ हुआ था, वहीं इस बार बजट से मिलने वाली ‘बूस्टर डोज’ से इंडस्ट्री को लंबे समय तक ग्रोथ का रास्ता मिल सकता है।
कल बजट पेश होने के बाद ही असल तस्वीर साफ होगी, लेकिन फिलहाल उम्मीदों का पारा चढ़ा हुआ है!
