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ईरान पर हमला बड़ी भूल होगी: ट्रंप की धमकियों के बीच इस्लामिक देशों का सख्त रुख, ईरान ने दी ‘अब तक की सबसे कड़ी जवाबी कार्रवाई’ की चेतावनी

ईरान पर हमला बड़ी भूल होगी: ट्रंप की धमकियों के बीच इस्लामिक देशों का सख्त रुख, ईरान ने दी ‘अब तक की सबसे कड़ी जवाबी कार्रवाई’ की चेतावनी

वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को लेकर लगातार धमकियां बढ़ती जा रही हैं, लेकिन इस्लामिक वर्ल्ड इससे बिलकुल नहीं डर रहा। ट्रंप ने 28 जनवरी 2026 को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ईरान को चेतावनी दी कि या तो न्यूक्लियर डील पर बात करें, वरना अगला हमला ‘काफी ज्यादा बुरा’ होगा। इसके जवाब में ईरान ने कहा कि अगर हमला हुआ तो जवाब ‘अब तक का सबसे कड़ा’ होगा – जिसमें अमेरिका, इजरायल और उनके समर्थकों को निशाना बनाया जाएगा। यह बयानबाजी ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी नौसेना का ‘मैसिव आर्माडा’ (विशाल बेड़ा) मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है, जिसमें USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर और तीन डिस्ट्रॉयर शामिल हैं।

ट्रंप की धमकी क्या है?

ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा: “समय खत्म हो रहा है! ईरान एक फेयर डील करे, वरना जून 2025 के ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ (ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर अमेरिका-इजरायल के हमले) से भी बुरा हमला होगा।” उन्होंने ईरान को ‘टाइम इज रनिंग आउट’ की चेतावनी दी और कहा कि अमेरिकी फोर्सेज ‘स्पीड और वायलेंस’ के साथ तैयार हैं। ट्रंप का फोकस ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर है, और वे इसे रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई की बात कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप ईरान में चल रहे प्रोटेस्ट्स को भड़काकर रिजीम चेंज करना चाहते हैं – जैसे प्रोटेस्टर्स की एग्जीक्यूशन रोकने की धमकी देकर।

ईरान और इस्लामिक वर्ल्ड का जवाब

ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार अली शामखानी ने X पर पोस्ट कर कहा: “अगर अमेरिका ने हमला किया, तो ईरान अमेरिका, इजरायल और उनके समर्थकों पर हमला करेगा – जवाब जैसा कभी नहीं देखा होगा।” ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी कहा कि ईरान डायलॉग के लिए तैयार है, लेकिन अगर धकेला गया तो डिफेंड करेगा।

इस बीच, यूरोपीय यूनियन ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को ‘टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन’ घोषित कर दिया है, जो ईरान के लिए बड़ा झटका है। लेकिन इस्लामिक देश जैसे पाकिस्तान, तुर्की और कुछ गल्फ स्टेट्स ने ट्रंप की धमकियों की निंदा की है, कहते हुए कि यह रिजनल स्टेबिलिटी को खतरा है। ईरान ने चेतावनी दी कि उसकी ‘फिंगर्स ऑन ट्रिगर’ हैं, और कोई भी हमला रिजनल वॉर को ट्रिगर कर सकता है।

पृष्ठभूमि में क्या है?

यह तनाव पिछले महीनों से बढ़ रहा है। जून 2025 में अमेरिका-इजरायल के हमलों ने ईरान के न्यूक्लियर साइट्स को नुकसान पहुंचाया था, जिसके बाद ईरान में बड़े प्रोटेस्ट्स हुए। ट्रंप ने प्रोटेस्टर्स की सपोर्ट में बयान दिए और एग्जीक्यूशन रोकने की धमकी दी। अब ट्रंप फिर से स्ट्राइक्स की बात कर रहे हैं, शायद रिजीम को गिराने के लिए। लेकिन ईरान का कहना है कि वह कमजोर नहीं है और रिटेलिएट करेगा – US फोर्सेज, पड़ोसी देशों पर हमले से।

क्या हो सकता है आगे?

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर हमला हुआ तो रिजनल वॉर हो सकती है – जिसमें ईरान US बेसेज, इजरायल और गल्फ स्टेट्स को टारगेट करेगा। ट्रंप असासिनेशन थ्रेट्स पर भी चेतावनी दे चुके हैं। डिप्लोमैटिक सॉल्यूशन की उम्मीद कम है, लेकिन दोनों पक्ष डायलॉग की बात कर रहे हैं।

यह स्थिति मिडिल ईस्ट को फिर से अस्थिर कर सकती है – दुनिया की नजरें ट्रंप के अगले कदम पर टिकी हैं।

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