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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: सभी राज्यों से एसिड अटैक मामलों का साल-दर-साल ब्यौरा मांगा

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: सभी राज्यों से एसिड अटैक मामलों का साल-दर-साल ब्यौरा मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक मामलों में न्यायिक देरी और पीड़ितों को मिलने वाली सुविधाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से साल-दर-साल (year-wise) एसिड अटैक घटनाओं का विस्तृत ब्यौरा मांगा है। यह निर्देश हालिया सुनवाई में आया, जहां अदालत ने एसिड अटैक ट्रायल में 16 साल की देरी को “राष्ट्रीय शर्म” और “न्याय व्यवस्था का मजाक” बताया।

किस संदर्भ में आया निर्देश?

दिसंबर 2025 में एक दिल्ली केस (2009 का एसिड अटैक) पर सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत और जस्टिस जोयमलया बागची की बेंच ने सभी हाई कोर्ट्स से लंबित एसिड अटैक ट्रायल्स का डेटा 4 हफ्तों में मांगा था।

अब कोर्ट ने राज्यों से घटनाओं का साल-दर-साल डेटा (incidence, attempted attacks, convictions, acquittals, compensation status आदि) मांगा है, ताकि एसिड अटैक रोकथाम, जांच, ट्रायल और पीड़ित सहायता की स्थिति का आकलन हो सके।

यह निर्देश लक्ष्मी बनाम भारत संघ (2013) जैसे पुराने आदेशों के बाद भी लागू न होने वाली नीतियों (एसिड बिक्री रेगुलेशन, मुआवजा, फ्री ट्रीटमेंट) पर फोकस करता है।

NALSA (नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी) से भी राज्य-वार और पीड़ित-वार मुआवजे का विस्तृत रिपोर्ट मांगा गया है (मार्च 2024 से अप्रैल 2025 तक ₹484 करोड़ वितरित हुए)।

NCRB के उपलब्ध आंकड़े (राष्ट्रीय स्तर पर साल-दर-साल)

NCRB (National Crime Records Bureau) के अनुसार भारत में रिपोर्टेड एसिड अटैक मामलों की संख्या:

2017: 244 मामले

2018: 228 मामले

2019: 240 मामले

2020: 182 मामले

2021: 176 मामले

2022: 202 मामले

2023: 207 मामले (65 attempted attacks के साथ)

नोट: ये आंकड़े केवल रिपोर्टेड हैं। विशेषज्ञों (जैसे Acid Survivors Saahas Foundation) का अनुमान है कि असल संख्या सालाना 1,000 के करीब हो सकती है, क्योंकि सामाजिक कलंक, परिवार का दबाव और प्रतिशोध का डर रिपोर्टिंग रोकता है।

राज्य-वार हॉटस्पॉट (2023 NCRB डेटा):

पश्चिम बंगाल: सबसे ज्यादा (57 मामले)

उत्तर प्रदेश: 31 मामले

गुजरात: 15 मामले

अन्य राज्य जैसे महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा में भी मामले रिपोर्ट होते हैं, लेकिन पूर्ण राज्य-वार साल-दर-साल डेटा NCRB रिपोर्ट्स में उपलब्ध है (Crime in India रिपोर्ट्स)।

कोर्ट का फोकस:

ट्रायल तेज करने के लिए स्पेशल कोर्ट्स।

एसिड बिक्री पर सख्ती (2013 मॉडल रूल्स लागू नहीं होने पर)।

पीड़ितों को ₹3 लाख+ मुआवजा, फ्री मेडिकल/प्लास्टिक सर्जरी, PwD लिस्ट में शामिल करना।

फोर्स्ड एसिड इंजेक्शन को अटेम्प्ट टू मर्डर मानना।

कोर्ट ने कहा कि पीड़ितों को दर-दर भटकना पड़ रहा है, और कई राज्यों में मुआवजा देरी या अधूरा है (जैसे महाराष्ट्र, UP में सिर्फ ₹1 लाख मिला)। 8 राज्य और 5 UT ने अभी तक एफिडेविट नहीं दाखिल किया।

यह निर्देश एसिड अटैक रोकथाम और पीड़ित न्याय में बड़ा कदम है। राज्य सरकारों को अब जल्द डेटा जमा करना होगा, जिससे आगे की नीतियां और मॉनिटरिंग मजबूत हो सकेगी।

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