‘मणिकर्णिका घाट जाने पर अड़े सपा सांसद, पुलिस से तीखी नोकझोंक: धरने पर बैठे, घर में नजरबंद’
‘मणिकर्णिका घाट जाने पर अड़े सपा सांसद, पुलिस से तीखी नोकझोंक: धरने पर बैठे, घर में नजरबंद’
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने देवी अहिल्याबाई होल्कर की खंडित मूर्ति और घाट पर चल रहे पुनर्विकास कार्यों की जांच के लिए आज (25 जनवरी 2026) घाट जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान सपा सांसद वीरेंद्र सिंह (Virendra Singh) और अन्य नेताओं के साथ पुलिस की तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद वे सड़क पर ही धरने पर बैठ गए।
क्या हुआ घटनाक्रम?
सपा नेतृत्व (अखिलेश यादव के निर्देश पर) ने 11 सदस्यीय टीम बनाई, जिसमें सांसद वीरेंद्र सिंह प्रमुख थे।
टीम का उद्देश्य: घाट पर अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति खंडित होने और अन्य मंदिरों/संरचनाओं पर प्रभाव की जांच करना।
पुलिस ने घाट जाने से रोका, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला दिया।
सांसद वीरेंद्र सिंह ने पुलिस से बहस की, कहा कि “हम जनता के प्रतिनिधि हैं, जांच का अधिकार है”।
नोकझोंक के बाद पुलिस ने कई नेताओं को नजरबंद कर घर भेज दिया, कुछ को घर में ही रोक लिया गया।
सांसद धरने पर बैठ गए, प्रदर्शन जारी।
विवाद का बैकग्राउंड:
मणिकर्णिका घाट पर पुनर्विकास कार्य चल रहे हैं, जिसके दौरान अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति क्षतिग्रस्त होने का दावा।
सोशल मीडिया पर AI-जनरेटेड फेक वीडियो वायरल हुए, जिससे तनाव बढ़ा।
विपक्ष (सपा, कांग्रेस, AAP) ने इसे “सनातन विरासत पर हमला” बताया।
यूपी सरकार ने फेक वीडियो फैलाने वालों पर FIR दर्ज की (जिसमें संजय सिंह, पप्पू यादव आदि शामिल)।
इससे पहले भी प्रदर्शनकारियों (धनगर समाज, PDA आदि) पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, कई गिरफ्तारियां हुईं।
प्रतिक्रियाएं:
सपा ने इसे “लोकतंत्र पर हमला” बताया, कहा कि जांच रोकना गलत है।
पुलिस का कहना: “घाट पर भीड़ और सुरक्षा के कारण रोक लगाई गई, कोई राजनीतिक दबाव नहीं”।
यह घटना गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) से ठीक एक दिन पहले हुई, जिससे राजनीतिक रंग और गहरा गया है।
वाराणसी में मणिकर्णिका घाट अब सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि राजनीतिक मैदान बन गया है। क्या सपा टीम जांच कर पाएगी या विवाद और बढ़ेगा? स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं।
