राजनीति

बजट सत्र में कांग्रेस का तूफान: राहुल गांधी की जी-राम-जी कानून vs मनरेगा पर जोरदार तैयारी, हंगामा तय?

बजट सत्र में कांग्रेस का तूफान: राहुल गांधी की जी-राम-जी कानून vs मनरेगा पर जोरदार तैयारी, हंगामा तय?

आगामी बजट सत्र में कांग्रेस पार्टी विपक्षी भूमिका में जोरदार हमला बोलने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ग्रामीण रोजगार से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है। खासतौर पर केंद्र सरकार के नए ‘जी-राम-जी’ (ग्रामीण रोजगार एवं मजदूरी गारंटी) कानून और मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के बीच तुलना को लेकर बड़ा हंगामा होने के आसार हैं। कांग्रेस का आरोप है कि जी-राम-जी कानून मनरेगा को कमजोर करने की साजिश है, जबकि सरकार इसे ग्रामीण विकास का नया आयाम बता रही है।

बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू होने वाला है, जिसमें अंतरिम बजट पेश किया जाएगा। कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी ने हाल ही में केरल के कोझिकोड में एक बंद कमरे की बैठक में पार्टी नेताओं से चर्चा की, जहां जी-राम-जी कानून की कमियों को उजागर करने की रणनीति बनाई गई। राहुल ने कहा, “मनरेगा गांधीजी का सपना था, जो करोड़ों ग्रामीणों को रोजगार देता है। लेकिन जी-राम-जी कानून में मजदूरी गारंटी कम है, आवंटन घटाया गया है और इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप की गुंजाइश ज्यादा है। हम संसद में इस पर जोरदार बहस करेंगे और जरूरत पड़ी तो हंगामा भी।”

जी-राम-जी कानून क्या है?

केंद्र सरकार ने पिछले साल दिसंबर में ग्रामीण रोजगार एवं मजदूरी गारंटी (जी-राम-जी) कानून पेश किया था, जिसका उद्देश्य मनरेगा को अपग्रेड करना बताया गया। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में 150 दिनों की गारंटीड मजदूरी, डिजिटल ट्रैकिंग और कौशल विकास को शामिल किया गया है। लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि यह कानून मनरेगा के फंड को डायवर्ट करेगा और ग्रामीण गरीबों को ठगने का तरीका है। विपक्षी दलों का कहना है कि मनरेगा में पहले से 100 दिनों की गारंटी है, लेकिन जी-राम-जी में मजदूरी दरें कम हैं और आवेदन प्रक्रिया जटिल है।

राहुल गांधी की तैयारी

राहुल गांधी ने हाल के भारत जोड़ो न्याय यात्रा में ग्रामीण मुद्दों पर फोकस किया था। अब वे संसद में डेटा और रिपोर्ट्स के साथ सरकार को घेरने की योजना बना रहे हैं। कांग्रेस ने एक विशेष टास्क फोर्स बनाई है, जिसमें अर्थशास्त्री और ग्रामीण विशेषज्ञ शामिल हैं। पार्टी प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा, “बजट सत्र में हम जी-राम-जी vs मनरेगा पर डिबेट मांगेंगे। अगर सरकार जवाब नहीं देगी तो संसद नहीं चलने देंगे।” वहीं, बीजेपी ने इसे विपक्ष की नकारात्मक राजनीति करार दिया। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, “कांग्रेस मनरेगा को राजनीतिक हथियार बनाती रही है, लेकिन जी-राम-जी से ग्रामीण भारत मजबूत होगा।”

संसद में हंगामे के आसार

पिछले सत्रों में कांग्रेस ने अडाणी मुद्दे, किसान कानूनों और महंगाई पर हंगामा किया था। अब जी-राम-जी कानून को लेकर विपक्षी एकता की कोशिश हो रही है। टीएमसी, डीएमके और अन्य दल भी कांग्रेस के साथ आ सकते हैं। लोकसभा स्पीकर ने सभी दलों से शांतिपूर्ण बहस की अपील की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सत्र हंगामेदार होगा।

यह मुद्दा ग्रामीण वोट बैंक से जुड़ा है, जो लोकसभा चुनाव 2026 में निर्णायक साबित हो सकता है। आगे की अपडेट्स के लिए बने रहें।

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