पुतिन ने नेतन्याहू से की बात, फिर ईरानी राष्ट्रपति को लगाया फोन! मध्य पूर्व में शांति के लिए रूस की मध्यस्थता की पेशकश
पुतिन ने नेतन्याहू से की बात, फिर ईरानी राष्ट्रपति को लगाया फोन! मध्य पूर्व में शांति के लिए रूस की मध्यस्थता की पेशकश
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आज शुक्रवार को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात की, जिसमें मध्य पूर्व की स्थिति और ईरान को लेकर चर्चा हुई। इसके ठीक बाद पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को भी फोन किया। क्रेमलिन के अनुसार, दोनों बातचीतों में रूस ने क्षेत्रीय स्थिरता के लिए मध्यस्थता की पेशकश की और राजनीतिक-कूटनीतिक प्रयासों को तेज करने पर जोर दिया। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान पर अमेरिकी हमले की आशंका से क्षेत्रीय तनाव चरम पर है।
नेतन्याहू से क्या हुई बात?
क्रेमलिन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पुतिन ने नेतन्याहू से मध्य पूर्व की स्थिति पर चर्चा की, खासकर ईरान के आसपास के हालात पर।
पुतिन ने रूस की ओर से ईरान से जुड़े मुद्दों पर मध्यस्थता की पेशकश की और कहा कि क्षेत्र में स्थिरता व सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक व कूटनीतिक प्रयासों को तेज करना चाहिए।
दोनों नेताओं ने विभिन्न स्तरों पर संपर्क जारी रखने पर सहमति जताई। क्रेमलिन ने यह भी पुष्टि की कि रूस मध्यस्थता प्रयासों को जारी रखने और सभी संबंधित देशों के साथ रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देने के लिए तैयार है।
ईरानी राष्ट्रपति से क्या चर्चा हुई?
नेतन्याहू से बात के बाद पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर संपर्क किया।
क्रेमलिन ने कहा कि इस बातचीत में भी मध्य पूर्व और ईरान की स्थिति पर फोकस रहा, जहां पुतिन ने डी-एस्केलेशन (तनाव कम करने) में मदद की पेशकश की। रूस ने ईरान के साथ अपने मजबूत संबंधों का हवाला देकर मध्यस्थता की भूमिका निभाने की इच्छा जताई।
पेजेशकियन के साथ चर्चा में रूस ने क्षेत्रीय स्थिरता के लिए राजनीतिक प्रयासों को बढ़ाने पर जोर दिया, जो नेतन्याहू वाली बातचीत से मिलती-जुलती थी।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह फोन कॉल्स ऐसे समय में हुए हैं जब अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ रहा है, और इजरायल-ईरान के बीच भी विवाद जारी है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पुतिन पहले भी इजरायल और ईरान के बीच संदेशों का आदान-प्रदान कर चुके हैं।
क्रेमलिन के प्रवक्ता ने कहा कि पुतिन इजरायल और ईरान दोनों नेताओं से संपर्क में हैं ताकि “डी-एस्केलेशन” में मदद की जा सके। यह रूस की क्षेत्रीय भूमिका को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
ये घटनाक्रम मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच महत्वपूर्ण हैं, जहां रूस खुद को एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है। क्या इससे कोई बड़ा बदलाव आएगा, ये आने वाले दिनों में साफ होगा!
