जन सुराज पार्टी में संकट के बादल: रितेश पांडे के इस्तीफे के बाद RCP सिंह की JDU वापसी की चर्चा तेज
जन सुराज पार्टी में संकट के बादल: रितेश पांडे के इस्तीफे के बाद RCP सिंह की JDU वापसी की चर्चा तेज
पटना, 14 जनवरी 2026: प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को लगातार झटके लग रहे हैं। हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव में कहलगांव सीट से उम्मीदवार रहे भोजपुरी गायक रितेश पांडे ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया, और अब पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह के भी मोह भंग होने की खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि RCP सिंह जल्द ही नीतीश कुमार की जेडीयू में वापसी कर सकते हैं, जिससे जन सुराज के भविष्य पर सवालिया निशान लग गए हैं।
रितेश पांडे का इस्तीफा: बड़ा झटका
भोजपुरी स्टार रितेश पांडे ने 12 जनवरी को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर जन सुराज से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी में काम करना ‘बहुत मुश्किल’ हो गया है और वे अपने समर्थकों के साथ आगे की रणनीति पर विचार करेंगे। इस्तीफे के अगले ही दिन रितेश दिल्ली में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेव के साथ नजर आए, जिससे उनके भाजपा जॉइन करने की अटकलें तेज हो गईं। रितेश ने चुनाव में जन सुराज के टिकट पर लड़ाई लड़ी थी, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी असफलता ने कई नेताओं का मनोबल तोड़ा है।
RCP सिंह की संभावित विदाई: नीतीश से पुराना रिश्ता
आरसीपी सिंह, जो कभी नीतीश कुमार के सबसे करीबी थे और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं, अब जन सुराज में असहज महसूस कर रहे हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “मैं और नीतीश कुमार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।” यह बयान JDU में उनकी वापसी की ओर इशारा कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, RCP सिंह को लगता है कि जन सुराज का राजनीतिक रुझान अब उनके विचारों से मेल नहीं खा रहा। यदि वे जाते हैं, तो यह प्रशांत किशोर के लिए दूसरा बड़ा झटका होगा, क्योंकि RCP को पार्टी में सीनियर लीडर के रूप में शामिल किया गया था।
जन सुराज का भविष्य: चुनौतियां और संभावनाएं
जन सुराज पार्टी ने बिहार चुनाव में 150 से ज्यादा सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन सिर्फ 2-3 सीटों पर जीत मिली। चुनावी हार, आंतरिक कलह और नेताओं का पलायन पार्टी की नींव हिला रहा है। प्रशांत किशोर ने अभी तक इन इस्तीफों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन सूत्र बताते हैं कि वे पार्टी को मजबूत करने के लिए नए चेहरों को लाने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, अगर बड़े नेता लगातार छोड़ते रहे, तो 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी की साख पर असर पड़ सकता है।
क्यों हो रहा मोह भंग?
चुनावी असफलता: पार्टी के बड़े दावों के बावजूद खराब प्रदर्शन ने कार्यकर्ताओं का उत्साह कम किया।
आंतरिक असंतोष: कुछ नेताओं को लगता है कि प्रशांत किशोर का फैसला लेने का तरीका एकतरफा है।
अन्य दलों का आकर्षण: BJP और JDU जैसे स्थापित दल नए चेहरों को लुभा रहे हैं।
बिहार की राजनीति में जन सुराज एक नई हवा लेकर आई थी, लेकिन अब सवाल है कि क्या यह तूफान बन पाएगी या सिर्फ गुबार? आने वाले दिनों में प्रशांत किशोर की रणनीति पर सबकी नजरें टिकी हैं।
