योगी सरकार का बड़ा फैसला: अब RTE कोटे में स्कूल एडमिशन के लिए बच्चे का आधार कार्ड नहीं होगा अनिवार्य!
योगी सरकार का बड़ा फैसला: अब RTE कोटे में स्कूल एडमिशन के लिए बच्चे का आधार कार्ड नहीं होगा अनिवार्य!
उत्तर प्रदेश सरकार ने राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट के तहत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में गरीब और वंचित बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया को और आसान बनाने का बड़ा कदम उठाया है। अब बच्चे के स्कूल एडमिशन के लिए बच्चे का आधार कार्ड अनिवार्य नहीं रहेगा, और माता-पिता के दोनों आधार कार्ड की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।
क्या बदला है नया नियम?
पहले ऑनलाइन आवेदन के समय बच्चे और दोनों माता-पिता के आधार कार्ड की अनिवार्यता थी, जिससे कई पात्र परिवार दस्तावेजों की कमी के कारण बाहर हो जाते थे।
अब आवेदन के लिए कम से कम एक माता-पिता का आधार पर्याप्त होगा, लेकिन बच्चे का आधार बिल्कुल जरूरी नहीं।
आधार की जरूरत सिर्फ आर्थिक सहायता (फीस प्रतिपूर्ति) के लिए रहेगी। RTE के तहत मिलने वाली राशि (स्कूल फीस और यूनिफॉर्म/किताबों के लिए ₹5,000 सालाना) केवल आधार से लिंक्ड बैंक अकाउंट में ट्रांसफर होगी।
यह बदलाव 2026-27 सत्र के लिए लागू है, जिसका आदेश बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने जारी किया है।
सरकार का उद्देश्य
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला RTE एक्ट की भावना के अनुरूप है। इसका मुख्य मकसद वंचित और कमजोर वर्ग के परिवारों को दस्तावेजों की जटिलताओं से राहत देकर अधिक से अधिक बच्चों को निजी स्कूलों में शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। कई छोटे बच्चों के पास आधार कार्ड नहीं होता, जिससे पहले एडमिशन में बाधा आती थी।
RTE कोटे की मुख्य बातें (बिना बदलाव के)
निजी स्कूलों में कुल सीटों का 25% RTE के तहत गरीब/ईडब्ल्यूएस/वंचित बच्चों के लिए आरक्षित।
आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन (rte25.upsdc.gov.in पोर्टल पर)।
स्कूल आवंटन लॉटरी सिस्टम से।
आयु सीमा: नर्सरी/प्राइमरी के अनुसार 3-7 वर्ष तक।
यह फैसला अभिभावकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, खासकर ग्रामीण और कम आय वाले परिवारों के लिए। अगर आप RTE कोटे में एडमिशन के लिए आवेदन करने की सोच रहे हैं, तो जल्दी से जरूरी दस्तावेज (जन्म प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण आदि) तैयार रखें और पोर्टल पर नजर बनाए रखें!
