ISRO का वर्कहॉर्स PSLV: 63 उड़ानों में 60 सफल, कल होगी नई उड़ान PSLV-C62 से!
ISRO का वर्कहॉर्स PSLV: 63 उड़ानों में 60 सफल, कल होगी नई उड़ान PSLV-C62 से!
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) देश का सबसे भरोसेमंद “वर्कहॉर्स” बना हुआ है। अब तक इसने 63 उड़ानें पूरी की हैं, जिनमें से 60 सफल रहीं—यानी करीब 95% सफलता दर! सिर्फ तीन उड़ानें (पूर्ण या आंशिक) असफल हुईं, जो इसकी विश्वसनीयता को दर्शाता है।
PSLV ने 1993 से अब तक चंद्रयान-1, मंगल ऑर्बिटर मिशन (मॉम), आदित्य-L1 और एस्ट्रोसैट जैसे ऐतिहासिक मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। 2017 में एक ही उड़ान में 104 सैटेलाइट्स लॉन्च कर विश्व रिकॉर्ड भी बनाया। यह रॉकेट मल्टी-सैटेलाइट लॉन्च में माहिर है और विदेशी ग्राहकों के लिए ISRO की कमर्शियल सर्विस (NSIL) का मजबूत आधार है।
अब 12 जनवरी को PSLV की 64वीं उड़ान
ISRO 2026 का आगाज PSLV-C62 मिशन से कर रहा है। यह उड़ान 12 जनवरी 2026 को सुबह 10:17 बजे IST श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर के फर्स्ट लॉन्च पैड से होगी। 25 घंटे की उल्टी गिनती 11 जनवरी से शुरू हो चुकी है।
मुख्य पेलोड और विशेषताएं:
प्राइमरी पेलोड: EOS-N1 (Anvesha) — DRDO द्वारा विकसित हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट। यह सैटेलाइट सैकड़ों वेवलेंथ्स में इमेजिंग कर सामग्री पहचान सकती है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा निगरानी, कृषि, शहरी मैपिंग और पर्यावरण निगरानी के लिए अहम है।
को-पैसेंजर सैटेलाइट्स: 18 अन्य छोटे सैटेलाइट्स (भारतीय स्टार्टअप्स, यूनिवर्सिटीज़ और विदेशी ग्राहकों के), जैसे स्पेनिश Kestrel Initial Demonstrator (रि-एंट्री टेक्नोलॉजी), CubeSats और ऑन-ऑर्बिट रिफ्यूलिंग पेलोड।
वैरिएंट: PSLV-DL (दो स्ट्रैप-ऑन बूस्टर्स)।
ऑर्बिट: सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट (SSPO) ~505 km ऊंचाई पर।
यह मिशन NSIL का 9वां डेडिकेटेड कमर्शियल लॉन्च है। खास बात—यह 2025 में PSLV-C61 (EOS-09) की असफलता (थर्ड स्टेज में समस्या) के बाद PSLV की वापसी का प्रतीक है। सफलता से PSLV पर भरोसा और मजबूत होगा।
PSLV की सफलता की झलक
कुल उड़ानें: 63 (जनवरी 2026 तक, PSLV-C61 तक)।
सफल: 60।
असफल: 3 (1993 की पहली डेवलपमेंटल उड़ान सहित)।
विश्व रिकॉर्ड: 104 सैटेलाइट्स एक साथ (PSLV-C37, 2017)।
विदेशी सैटेलाइट्स: 400+ से ज्यादा लॉन्च।
ISRO चेयरमैन ने मिशन की सफलता के लिए तिरुपति मंदिर में प्रार्थना भी की। लाइव स्ट्रीमिंग ISRO की वेबसाइट और सोशल मीडिया पर उपलब्ध होगी।
यह लॉन्च भारत की स्पेस पावर को नई ऊंचाई देगा—राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर कमर्शियल स्पेस तक!
