अन्तर्राष्ट्रीय

OPEC से UAE की विदाई: सऊदी के दबदबे को चुनौती और पाकिस्तान की बढ़ती मुश्किलें!

दुबई/रियाद, 29 अप्रैल 2026: खाड़ी क्षेत्र (गल्फ) में ईरान युद्ध के बीच एक नई लड़ाई की शुरुआत हो गई है — लेकिन ये सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने OPEC और OPEC+ से 1 मई 2026 से अपना सदस्यता समाप्त करने का ऐलान कर दिया है। यह फैसला लगभग 60 साल पुरानी सदस्यता खत्म करने वाला है और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले तेल कार्टेल को बड़ा झटका माना जा रहा है।

UAE का यह कदम ईरान युद्ध के दौरान गल्फ देशों के बीच बढ़ते मतभेदों को उजागर करता है। विशेषज्ञ इसे UAE द्वारा सऊदी अरब और पाकिस्तान को आंख दिखाने के रूप में देख रहे हैं।

UAE का आधिकारिक बयान

UAE एनर्जी मिनिस्टर सुहैल मोहम्मद अल मजरूई ने कहा कि यह फैसला देश के “राष्ट्रीय हित” और लंबे समय की रणनीति को ध्यान में रखकर लिया गया है। UAE अब उत्पादन कोटा (production quotas) से मुक्त होकर अपनी मर्जी से ज्यादा तेल निकाल सकेगा। ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल परिवहन बाधित होने के बावजूद यह कदम उठाया गया है।

UAE ने साफ कहा कि सऊदी अरब या किसी अन्य देश से इस बारे में कोई चर्चा नहीं की गई।

मुख्य वजहें

ईरान युद्ध और गल्फ में तनाव: फरवरी 2026 से चल रहे अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान युद्ध में UAE पर ईरानी हमले हुए। UAE ने गल्फ सहयोग परिषद (GCC) और अन्य अरब देशों के “कमजोर” जवाब की आलोचना की। सऊदी अरब ने ईरान के खिलाफ मजबूत एकजुटता नहीं दिखाई, बल्कि पाकिस्तान के माध्यम से डिप्लोमैटिक समाधान का समर्थन किया। UAE को यह पसंद नहीं आया।

सऊदी अरब के साथ पुराना राइवलरी: OPEC में सऊदी अरब de facto लीडर है। UAE लंबे समय से उत्पादन कोटा बढ़ाने की मांग कर रहा था, लेकिन सऊदी इसे मंजूर नहीं करता था। अब UAE अपनी पूरी क्षमता (लगभग 4.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन) से उत्पादन बढ़ा सकेगा।

पाकिस्तान पर नाराजगी: UAE ने हाल ही में पाकिस्तान से 3.5 बिलियन डॉलर के डिपॉजिट वापस मंगवा लिए (जो पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार का पांचवां हिस्सा था)। वजह — पाकिस्तान का ईरान युद्ध में न्यूट्रल रुख और मध्यस्थता की भूमिका। UAE इसे “मध्य मार्ग” मानकर नाराज है। सऊदी अरब ने पाकिस्तान की मदद की, जिससे UAE और नाराज हुआ।

इसका क्या असर होगा?

OPEC पर झटका: UAE OPEC का तीसरा/चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है। इसका निकलना कार्टेल की ताकत कम करेगा और तेल की कीमतों पर नियंत्रण मुश्किल होगा। कुछ विश्लेषक इसे “OPEC के अंत की शुरुआत” बता रहे हैं।

तेल बाजार: फिलहाल होर्मुज संकट के कारण बड़े असर की उम्मीद नहीं, लेकिन युद्ध खत्म होने के बाद प्राइस वॉर की आशंका है।

गल्फ पावर डायनामिक्स: UAE अब अमेरिका (ट्रंप) के करीब positioning कर रहा है। ट्रंप लंबे समय से OPEC की आलोचना करते रहे हैं।

पाकिस्तान पर असर: आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। सऊदी अरब को पाकिस्तान की मदद करनी पड़ी, लेकिन UAE का कदम क्षेत्रीय संतुलन बिगाड़ सकता है।

पृष्ठभूमि

UAE 1967 से OPEC सदस्य था। यह कदम लंबे समय से चल रही असहमति का नतीजा है, लेकिन ईरान युद्ध ने इसे तेज कर दिया। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में GCC की बैठक के ठीक पहले UAE ने यह बम फोड़ा।

विशेषज्ञों का कहना है कि गल्फ में अब “नई लड़ाई” शुरू हो गई है — तेल, प्रभाव और रणनीतिक गठबंधनों की। UAE अपनी स्वतंत्र नीति पर आगे बढ़ रहा है, जबकि सऊदी अरब अपनी लीडरशिप बचाने की कोशिश करेगा।

अपडेट (29 अप्रैल 2026 तक):

अभी तक सऊदी अरब या पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। तेल की कीमतों में हल्की उछाल देखी गई है। क्षेत्रीय राजनयिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

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