ईरान युद्ध का भारत पर प्रहार: होर्मुज स्ट्रैट बंद होने से LPG संकट गहराया, आयात में 51% की भारी गिरावट
ईरान युद्ध का भारत पर प्रहार: होर्मुज स्ट्रैट बंद होने से LPG संकट गहराया, आयात में 51% की भारी गिरावट
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग को दो महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन शांति की कोई राह नजर नहीं आ रही। इस युद्ध का सबसे विनाशकारी असर एशियाई देशों, विशेषकर भारत की रसोई पर पड़ा है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के साथ ही ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद किए जाने से भारत की एलपीजी (LPG) सप्लाई चेन बुरी तरह चरमरा गई है।
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट और क्या है संकट?
होर्मुज स्ट्रेट वह संकरा समुद्री मार्ग है जहाँ से दुनिया का 20% कच्चा तेल और भारत की जरूरत की 90% एलपीजी गुजरती है।
कच्चे तेल पर असर: भारत अपनी जरूरत का 55% कच्चा तेल इसी रास्ते से मंगाता था। हालांकि, सरकार ने अन्य 40 देशों से विकल्प तलाश कर 70% आपूर्ति बहाल कर ली है।
LPG की किल्लत: कच्चे तेल का विकल्प तो मिल गया, लेकिन एलपीजी की भरपाई करना मुश्किल साबित हो रहा है। भारत अपनी जरूरत की 60% एलपीजी आयात करता है, जिसका रास्ता अब बंद है।
आंकड़ों की जुबानी: मार्च में आधी रह गई गैस सप्लाई
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के हालिया आंकड़े भारत की चिंता बढ़ाने वाले हैं:
आयात में ऐतिहासिक गिरावट: फरवरी में भारत ने 17 लाख मीट्रिक टन एलपीजी का आयात किया था, जो मार्च में 51% घटकर महज 8.26 लाख मीट्रिक टन रह गया।
खपत पर ब्रेक: आपूर्ति बाधित होने से खपत में भी 16% की कमी दर्ज की गई है। फरवरी के 28.22 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले मार्च में केवल 23.79 लाख मीट्रिक टन खपत हुई।
घरेलू उत्पादन में तेजी: राहत की बात यह है कि देश के भीतर एलपीजी उत्पादन में 30% की बढ़ोतरी की गई है (फरवरी में 10.62 लाख टन से बढ़कर मार्च में 13.87 लाख टन)।
सरकार का ‘एक्शन प्लान’: ब्लैक मार्केटिंग रोकने और सप्लाई बनाए रखने की तैयारी
बाजार में एलपीजी की कमी और बढ़ती ब्लैक मार्केटिंग की खबरों के बीच केंद्र सरकार ने कई कड़े कदम उठाए हैं:
कमर्शियल कोटा में कटौती: घरों तक रसोई गैस पहुंचती रहे, इसके लिए कमर्शियल गैस के कोटे को कम कर दिया गया है।
PNG पर जोर: सरकार अब सिलेंडर के बजाय पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) पर फोकस कर रही है। मार्च से अब तक 5.96 लाख नए PNG कनेक्शन दिए जा चुके हैं, जिससे कुल संख्या 8.64 लाख पहुंच गई है।
छोटे सिलेंडरों का सहारा: प्रवासी मजदूरों और छात्रों के लिए 5 किलो वाले छोटे सिलेंडरों की बिक्री तेज कर दी गई है। अप्रैल से अब तक 22.78 लाख ऐसे सिलेंडर बेचे गए हैं।
आगे की राह चुनौतीपूर्ण
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो भी जाता है, तो भी होर्मुज स्ट्रेट में फंसे दर्जनों भारतीय जहाजों को निकालने और सप्लाई सामान्य करने में महीनों का समय लग सकता है। फिलहाल, भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए घरेलू उत्पादन और वैकल्पिक पाइपलाइन नेटवर्क पर निर्भर है।
ब्यूरो रिपोर्ट, दिल्ली
