ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट: विकास और विवाद की पूरी कहानी
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट (आधिकारिक नाम: Holistic Development of Great Nicobar Island) भारत सरकार का एक महत्वाकांक्षी ₹72,000 से ₹92,000 करोड़ का मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है। यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के सबसे दक्षिणी द्वीप ग्रेट निकोबार पर विकसित किया जा रहा है।
प्रोजेक्ट के मुख्य Components (क्या-क्या बनेगा?)
इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट (Galathea Bay में) — 14.2 मिलियन TEU क्षमता।
ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट (सिविल-मिलिट्री ड्यूल यूज)।
टाउनशिप (नया शहर/स्मार्ट सिटी)।
450 MVA पावर प्लांट (गैस + सोलर)।
रोड, पावर, पानी आदि संबंधी इंफ्रास्ट्रक्चर।
कुल क्षेत्र: लगभग 166 वर्ग किलोमीटर (द्वीप का करीब 16%)। इसमें से 130+ वर्ग किमी जंगल शामिल।d02d8b
प्रोजेक्ट का उद्देश्य (सरकार का दावा)
रणनीतिक महत्व: मलक्का स्ट्रेट के पास होने से हिंद महासागर में भारत की नौसैनिक मौजूदगी, निगरानी और रक्षा क्षमता बढ़ेगी (चीन के प्रभाव को काउंटर)।
आर्थिक: भारत को बड़ा ट्रांसशिपमेंट हब बनाना, विदेशी पोर्ट्स (जैसे सिंगापुर, कोलंबो) पर निर्भरता कम करना।
विकास: रोजगार, पर्यटन और द्वीपों का समग्र विकास।
क्यों इतना बवाल और विवाद?
विपक्ष (खासकर राहुल गांधी), पर्यावरणविद् और स्थानीय जनजातीय समुदायों का आरोप:
पर्यावरणीय नुकसान:
लाखों पेड़ (8-9 लाख अनुमानित) कटेंगे।
गलाथिया बे — लेदरबैक कछुओं का महत्वपूर्ण नेस्टिंग साइट।
कोरल रीफ्स, मैंग्रोव, रेनफॉरेस्ट और संकटग्रस्त प्रजातियों (Nicobar megapode, crab-eating macaque आदि) को खतरा।
भूकंप-प्रवण क्षेत्र में बड़ा निर्माण — सुनामी/प्राकृतिक आपदा का खतरा बढ़ सकता है।
जनजातीय अधिकार:
शोम्पेन (PVTG — Particularly Vulnerable Tribal Group) और साउदर्न निकोबरी जनजातियों के पारंपरिक क्षेत्र प्रभावित।
भूमि अधिग्रहण/रिलोकेशन के आरोप, consent (सहमति) को लेकर विवाद।
Forest Rights Act (FRA) का उल्लंघन होने के आरोप।
अन्य मुद्दे:
पर्यावरण मंजूरी प्रक्रिया में कमियां (NGT ने मंजूरी दी, लेकिन विवाद जारी)।
राहुल गांधी ने इसे “सबसे बड़ा घोटाला और प्राकृतिक-आदिवासी विरासत पर सबसे बड़ा अपराध” बताया।
सरकार का जवाब: प्रोजेक्ट में पर्यावरणीय safeguards, coral translocation, monitoring committees और tribal welfare plan हैं। कोई जबरन विस्थापन नहीं, रणनीतिक जरूरत है। NGT ने भी मंजूरी दी है।
वर्तमान स्थिति (मई 2026)
पर्यावरण मंजूरी मिल चुकी है, NGT ने याचिकाएं खारिज कीं।
जनजातीय नेताओं ने भूमि सौंपने का दबाव लगाने के आरोप लगाए हैं।
राजनीतिक बहस तेज — विकास vs संरक्षण।
निष्कर्ष: यह प्रोजेक्ट रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन इको-सेंसिटिव क्षेत्र में होने के कारण पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों का संतुलन बनाना बड़ी चुनौती है। विवाद इसलिए है क्योंकि यह विकास और संरक्षण के बीच टकराव का क्लासिक उदाहरण है।
