“चेन्नई में आपके जैसी हजारों आलिया हैं”: सद्गुरु ने लाइव इंटरव्यू में आलिया भट्ट को किया ‘रोस्ट’, नेपोटिज्म पर छिड़ी नई जंग
“चेन्नई में आपके जैसी हजारों आलिया हैं”: सद्गुरु ने लाइव इंटरव्यू में आलिया भट्ट को किया ‘रोस्ट’, नेपोटिज्म पर छिड़ी नई जंग
मुंबई: बॉलीवुड में नेपोटिज्म (भाई-भतीजावाद) की बहस एक बार फिर सोशल मीडिया पर ज्वालामुखी की तरह फट पड़ी है। इस बार केंद्र में कोई फिल्मी हस्ती नहीं, बल्कि आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु हैं। हाल ही में अभिनेत्री आलिया भट्ट के साथ एक बातचीत के दौरान सद्गुरु ने कुछ ऐसा कह दिया, जिसे नेटिज़न्स “सबसे बड़ा लाइव रोस्ट” बता रहे हैं।
सद्गुरु का वो बयान, जिसने मचाया तहलका
https://x.com/i/status/2050586736473080025
सोशल मीडिया (X) पर वायरल हो रहे एक वीडियो क्लिप में सद्गुरु आलिया भट्ट से सीधे तौर पर टैलेंट और सपोर्ट सिस्टम पर बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा:
”मैं आपका अपमान नहीं करना चाहता, आप एक बेहतरीन अभिनेत्री हैं। लेकिन अकेले चेन्नई शहर में ही आपके जैसी हजारों आलिया भट्ट हो सकती हैं। आपको शुरुआत से ही अपने आसपास के लोगों से जो सपोर्ट और मेंटरशिप मिली, उसी की वजह से आप आज इस मुकाम पर हैं। बहुत से प्रतिभाशाली लोग सिर्फ सही सपोर्ट न मिलने के कारण अपनी क्षमता साबित नहीं कर पाते।”
सद्गुरु का यह तर्क ‘टैलेंट बनाम नर्चरिंग’ (प्रतिभा बनाम परवरिश) पर आधारित था। उन्होंने स्पष्ट किया कि आलिया की सफलता में उनके व्यक्तिगत टैलेंट के साथ-साथ उनके ‘सिस्टम’ और ‘कनेक्शन्स’ की भी बड़ी भूमिका रही है।
सोशल मीडिया पर ‘एपिक रोस्ट’ के चर्चे
वीडियो के वायरल होते ही इंटरनेट दो गुटों में बंट गया है।
आलोचक: कई यूजर्स ने इसे “लाइव बर्न” करार दिया। लोगों का कहना है कि सद्गुरु ने बिना डरे वह बात कह दी जो बॉलीवुड में अक्सर छिपाई जाती है। एक यूजर ने लिखा, “करण जौहर के सपोर्ट के बिना आलिया यहाँ तक नहीं पहुँचतीं।”
साउथ बनाम बॉलीवुड: बहस में साउथ फिल्म इंडस्ट्री की भी एंट्री हो गई है। यूजर्स ने लिखा कि अल्लू अर्जुन और राम चरण जैसे कलाकार भी फिल्मी परिवारों से हैं, लेकिन बॉलीवुड में दूसरों की फिल्में ‘छीने’ जाने का कल्चर इसे और गंदा बनाता है।
बचाव पक्ष: वहीं, कुछ फैंस का कहना है कि सद्गुरु की बात को संदर्भ से बाहर लिया जा रहा है। उनका उद्देश्य आलिया को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि यह समझाना था कि कैसे एक सही माहौल किसी के टैलेंट को चमका सकता है।
क्या है इस बयान के मायने?
यह पहली बार नहीं है जब आलिया भट्ट को नेपोटिज्म के मुद्दे पर घेरा गया हो, लेकिन एक आध्यात्मिक गुरु द्वारा इस विषय पर इतनी बेबाकी से बोलना हैरान करने वाला है। सद्गुरु का इशारा साफ था—प्रतिभा हर गली-नुक्कड़ पर है, बस उसे ‘रॉयल’ लॉन्च और मेंटरशिप नसीब नहीं होती।
निष्कर्ष: इस “सद्भाव और कड़वे सच” वाली बातचीत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बॉलीवुड में नेपोटिज्म एक ऐसा घाव है जो बार-बार कुरेदने पर हरा हो जाता है।
क्या आपको लगता है कि सद्गुरु की बात सही थी या उन्होंने आलिया के टैलेंट को कम करके आंका?
