EVM विवाद: हैकिंग के दावे बनाम चुनाव आयोग की दलीलें, क्या वाकई मुमकिन है छेड़छाड़?
भारत में EVM (Electronic Voting Machine) पर हर चुनाव के समय सवाल क्यों उठते हैं? यह मुख्य रूप से हारने वाले दलों/नेताओं की ओर से आता है। जब कोई पार्टी जीतती है तो EVM पर कोई सवाल नहीं उठता, लेकिन हारने पर अक्सर “EVM में गड़बड़ी” या “छेड़छाड़” का आरोप लगाया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार टिप्पणी की है कि “जीतते समय EVM ठीक, हारते समय तमpered”।
आइए विस्तार से समझते हैं — तकनीकी फॉल्ट क्या हैं, आरोप क्या हैं, और चुनाव आयोग (ECI) क्या कहता है।
1. EVM क्या है और कैसे काम करती है?
EVM में तीन मुख्य यूनिट होती हैं:
Ballot Unit (BU): मतदाता बटन दबाता है।
Control Unit (CU): वोट रिकॉर्ड होता है और गिनती करता है।
VVPAT (Voter Verifiable Paper Audit Trail): मतदाता को 7 सेकंड के लिए पेपर स्लिप दिखाई देती है (नाम + सिंबल), जो बाद में बॉक्स में गिर जाती है।
EVM स्टैंडअलोन मशीन है — कोई इंटरनेट, ब्लूटूथ, वाई-फाई या वायरलेस कनेक्शन नहीं।
सॉफ्टवेयर One Time Programmable (OTP) चिप में बर्न किया जाता है, जो बाद में बदल नहीं सकता (ECI का दावा)।
वोटिंग के बाद मशीन सील कर दी जाती है और मजबूत कमरे में रखी जाती है।
VVPAT 2013-14 से शुरू हुआ, जो मतदाता को “Seeing is Believing” का विश्वास देता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हर असेंबली सेगमेंट में 5 रैंडम VVPAT स्लिप्स की गिनती EVM से मैच की जाती है।
2. बार-बार क्यों उठते हैं सवाल?
राजनीतिक कारण: हारने वाली पार्टियां (विपक्ष या कभी सत्ताधारी भी) EVM को दोष देती हैं ताकि जनता में संदेह फैले और हार का बहाना मिले। कई बार नेता जीतने के बाद चुप हो जाते हैं।
ऐतिहासिक संदेह: 2004 से पूर्ण रूप से इस्तेमाल शुरू होने के बाद से आरोप लगते रहे। 2009-2010 में कुछ अंतरराष्ट्रीय रिसर्च (जैसे University of Michigan और Halderman टीम) ने कहा कि फिजिकल एक्सेस मिलने पर छेड़छाड़ संभव है।
VVPAT की मांग: विपक्ष 100% VVPAT स्लिप गिनती चाहता है, जो ECI और सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया (अप्रैल 2024 फैसला)।
3. मुख्य तकनीकी आरोप और फॉल्ट क्या बताए जाते हैं?
यहां प्रमुख आरोप और वास्तविकता:
हैकिंग/रिमोट कंट्रोल: आरोप — ब्लूटूथ या वायरलेस से वोट चुराए जा सकते हैं।
ECI जवाब: कोई नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं। OTP चिप री-प्रोग्राम नहीं हो सकती। Unauthorized Access Detection Module (UADM) लगी है, जो खोलने पर मशीन खराब कर देती है।
चिप/मदरबोर्ड बदलना: आरोप — 90 सेकंड में मदरबोर्ड बदलकर प्रोग्राम्ड चिप लगा दी जा सकती है (AAP आदि के डेमो)। या manufacturing स्टेज पर ही malicious हार्डवेयर डाला जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना (2010 Halderman रिपोर्ट): फिजिकल एक्सेस मिलने पर संभव — पार्ट बदलकर वोट प्रतिशत चुराना या counting से पहले वोट बदलना।
सॉफ्टवेयर री-प्रोग्रामिंग: RTI से पता चला कि कुछ चिप्स OTP नहीं बल्कि री-प्रोग्रामेबल हो सकती हैं (कुछ रिपोर्ट्स)।
ECI: चिप्स secure processors वाली हैं, OTP के बाद बदलाव नामुमकिन। Symbol Loading Unit (SLU) भी अब सील किया जाता है।
मालफंक्शन (तकनीकी खराबी):
VVPAT स्लिप न छपना, जाम होना, या गलत सिंबल दिखना।
गर्मी, धूप, या हैंडलिंग से सेंसर फेल होना (पश्चिम बंगाल, UP बाईपोल आदि में रिपोर्ट्स)।
बैटरी लेवल 99% दिखना (कांग्रेस ने हाल में आरोप लगाया)।
बटन दबाने पर गलत उम्मीदवार का लाइट जलना (पुराने आरोप)।
ECI: मशीनें इलेक्ट्रॉनिक हैं, इसलिए कभी-कभी फेल हो सकती हैं (रेट बहुत कम <0.5-1%)। बैकअप मशीन रखी जाती है। मालफंक्शन का मतलब छेड़छाड़ नहीं। VVPAT खराबी पर री-पोल होते हैं।
स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट: मशीनें महीनों स्टोर रहती हैं। आरोप — इस दौरान अंदरूनी लोग छेड़छाड़ कर सकते हैं।
4. चुनाव आयोग (ECI) के मुख्य सुरक्षा उपाय
कैंडिडेट-अग्नोस्टिक: EVM उम्मीदवार का नाम/सिंबल नहीं जानती, सिर्फ बटन नंबर।
रैंडमाइजेशन: दो स्तरों पर EVM आवंटन रैंडम।
फर्स्ट लेवल चेक (FLC): चुनाव से पहले मैन्युफैक्चरर (BEL/ECIL) टेक्निशियन चेक करते हैं, पार्टी प्रतिनिधि मौजूद।
सीलिंग और चेन ऑफ कस्टडी: पोलिंग, ट्रांसपोर्ट, स्टोरेज — सब सील, पार्टी एजेंट साइन करते हैं।
VVPAT वेरिफिकेशन: 5 पोलिंग स्टेशन प्रति सेगमेंट — मैच रेट लगभग 100% रहा है अब तक।
बर्न्ट मेमोरी वेरिफिकेशन: सुप्रीम कोर्ट आदेश पर हारने वाले उम्मीदवार 5% EVM की मेमोरी चेक करा सकते हैं (मैन्युफैक्चरर इंजीनियर द्वारा)।
कोई सबूत नहीं: ECI कहता है — आज तक कोई साबित मामला नहीं जहां EVM से चुनाव नतीजा बदला गया हो।
5. सुप्रीम कोर्ट का रुख (2024 फैसला और बाद)
अप्रैल 2024: 100% VVPAT क्रॉस वेरिफिकेशन और बैलेट पेपर पर वापसी की मांग खारिज।
कोर्ट ने कहा — बिना सबूत के बार-बार संदेह लोकतंत्र में अविश्वास पैदा करता है।
VVPAT स्लिप्स की मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त है। SLU को सील करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कई बार EVM को सुरक्षित माना है, लेकिन पारदर्शिता बढ़ाने के कुछ कदम सुझाए।
निष्कर्ष: तकनीकी फॉल्ट हैं या नहीं?
हां, तकनीकी खामियां हैं: कोई भी मशीन 100% परफेक्ट नहीं। VVPAT में मौसम/लाइट/मैनुअल एरर से खराबी होती है। फिजिकल एक्सेस (इंसाइडर अटैक) से थ्योरी में छेड़छाड़ की संभावना विशेषज्ञ बताते हैं।
लेकिन बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ मुश्किल: ECI की मल्टी-लेयर सुरक्षा (रैंडमाइजेशन, सीलिंग, VVPAT, पार्टी प्रतिनिधि) के कारण राष्ट्रीय स्तर पर नतीजा पलटना बहुत कठिन है। अब तक कोई ठोस सबूत (कोर्ट में साबित) नहीं मिला।
विश्वास का मुद्दा: मुख्य समस्या ट्रस्ट की है। हारने वाले आरोप लगाते हैं, जीतने वाले चुप। बार-बार विवाद से लोकतंत्र की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
समाधान के सुझाव (विशेषज्ञों/कोर्ट से):
VVPAT स्लिप्स की अधिक संख्या (जैसे 10-20%) की रैंडम गिनती।
मशीनों की स्वतंत्र ऑडिट और सोर्स कोड की कुछ पारदर्शिता (बहस जारी)।
बेहतर स्टोरेज सिक्योरिटी और मौसम प्रतिरोधी VVPAT।
बैलेट पेपर पर वापसी: कोर्ट और ECI दोनों इससे इनकार करते हैं क्योंकि पुरानी समस्याएं (बूथ कैप्चरिंग, बोगस वोटिंग, गिनती में देरी) वापस आ जाएंगी।
EVM ने भारत जैसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव प्रक्रिया को तेज, सस्ता और कम हिंसक बनाया है, लेकिन पूर्ण विश्वास के लिए निरंतर सुधार जरूरी है। अगर आपके पास कोई खास चुनाव या आरोप का उदाहरण है, तो और डिटेल में बता सकते हैं।
