‘ट्रंप के इशारों पर बर्बादी…’, ईरान में भारी बवाल के बीच खामेनेई का पहला बयान
‘ट्रंप के इशारों पर बर्बादी…’, ईरान में भारी बवाल के बीच खामेनेई का पहला बयान
तेहरान। ईरान में आर्थिक संकट, महंगाई और रियाल की गिरावट के खिलाफ 12 दिनों से जारी हिंसक प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को राष्ट्र के नाम संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला। खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों पर आरोप लगाया कि वे “ट्रंप को खुश करने के लिए अपनी ही सड़कों और संपत्तियों को बर्बाद कर रहे हैं”। उन्होंने ट्रंप को “अहंकारी” बताते हुए कहा कि उनका भी पतन होगा, जैसे फिरौन, निमरूद और पूर्व शाहों का हुआ।
खामेनेई का मुख्य संदेश क्या था?
ईरानी स्टेट टीवी पर प्रसारित संबोधन में खामेनेई ने कहा:
“प्रदर्शनकारी दूसरे देश के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपनी ही सड़कों को बर्बाद कर रहे हैं।”
“ट्रंप को यह जान लेना चाहिए कि घमंड के चरम पर तानाशाह गिराए जाते हैं। उनके हाथ ईरानियों के खून से सने हैं।”
“ईरान विदेशी दबाव के सामने नहीं झुकेगा। हम एकजुट राष्ट्र दुश्मन को हरा सकते हैं।”
“दंगाइयों (rioters) को उनकी जगह दिखानी होगी।”
खामेनेई ने प्रदर्शनों को विदेशी साजिश करार दिया और कहा कि कुछ “दंगाई” अमेरिका और इजरायल के इशारों पर काम कर रहे हैं। उन्होंने ट्रंप को सलाह दी कि “अपने देश की समस्याओं पर ध्यान दें”।
प्रदर्शनों की वजह और हालात
प्रदर्शन 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए, जब रियाल की भारी गिरावट और महंगाई से लोग सड़कों पर उतरे।
अब तक 111+ शहरों में फैले प्रदर्शनों में 45+ मौतें (HRANA के अनुसार, जिसमें बच्चे शामिल), हजारों गिरफ्तारियां।
गुरुवार रात पूरे ईरान में इंटरनेट और फोन ब्लैकआउट, कई फ्लाइट्स कैंसल।
प्रदर्शनकारी “खामेनेई मुर्दाबाद”, “मुल्लाओं को जाना होगा” जैसे नारे लगा रहे हैं। पूर्व क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया।
कई जगहों पर पुलिस स्टेशन पर हमले, आगजनी और झड़पें।
ट्रंप की चेतावनी ने क्यों बढ़ाया तनाव?
ट्रंप ने कई बार कहा कि अगर ईरानी अधिकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा बढ़ाते हैं या उन्हें मारते हैं, तो अमेरिका “कड़ी कार्रवाई” करेगा। उन्होंने फॉक्स न्यूज पर कहा, “हम लॉक एंड लोडेड हैं… अगर वे लोगों को मारना शुरू करेंगे, तो हम उन्हें बहुत जोर से मारेंगे।”
यह बयान वेनेजुएला में अमेरिकी एक्शन के बाद आया, जहां ट्रंप ने मदुरो को हटाया। ईरानी अधिकारी इसे “ट्रंप की धमकी” मानकर नाराज हैं।
क्या होगा आगे?
खामेनेई के इस बयान से साफ है कि रिजीम सख्त रुख अपनाएगा। सुरक्षा बलों को “दंगाइयों” पर कार्रवाई का संकेत मिला है। लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं मान रहे—वे अब रेजीम चेंज की मांग कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है, और ट्रंप की अनप्रेडिक्टेबल पॉलिसी से ईरान में डर का माहौल है।
ईरान के लिए यह सबसे बड़ा संकट है—क्या आर्थिक गुस्सा क्रांति में बदल जाएगा? या रिजीम दमन से बच जाएगा? दुनिया नजर रखे हुए है।
