राजनीति

ED ने कलकत्ता HC से अर्जेंट सुनवाई की मांग की, उधर ममता बनर्जी सड़कों पर उतरीं: I-PAC रेड के खिलाफ TMC का बड़ा विरोध

ED ने कलकत्ता HC से अर्जेंट सुनवाई की मांग की, उधर ममता बनर्जी सड़कों पर उतरीं: I-PAC रेड के खिलाफ TMC का बड़ा विरोध

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के ऑफिस और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जांच में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट से अर्जेंट सुनवाई की मांग की है। ED ने कोर्ट में दावा किया कि ममता बनर्जी ने छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण सबूतों (फिजिकल डॉक्यूमेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस) को जबरन ले लिया, जिससे जांच प्रभावित हुई।

ED ने अपनी याचिका में कहा कि छापेमारी कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ी है, जो 2020 में दर्ज Anup Majee मामले से संबंधित है। एजेंसी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और राज्य पुलिस ने जांच में “फ्लैग्रेंट” तरीके से बाधा डाली। ED ने CBI जांच की भी मांग की है। हालांकि, हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्टरूम में भीड़भाड़ के कारण मामला 14 जनवरी तक स्थगित कर दिया गया। ED अब चीफ जस्टिस से अर्जेंट लिस्टिंग की अपील कर रही है।

दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने ED की कार्रवाई को “राजनीतिक बदले की भावना” से प्रेरित बताते हुए शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को कोलकाता में बड़ा विरोध मार्च निकाला। हजारों TMC कार्यकर्ता उनके साथ शामिल हुए। मार्च जादवपुर 8B बस स्टैंड से शुरू होकर हजरा मोड़ तक गया। ममता ने आरोप लगाया कि ED TMC के आंतरिक दस्तावेज, चुनावी रणनीति, उम्मीदवारों की लिस्ट और 2026 विधानसभा चुनाव से जुड़े संवेदनशील डेटा को चुराने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “अगर हिम्मत है तो चुनाव में हराओ, एजेंसियों का दुरुपयोग करके नहीं।”

ममता ने ED के खिलाफ दो FIR भी दर्ज कराईं और दिल्ली में TMC सांसदों के साथ हुए व्यवहार की निंदा की, जहां उन्हें अमित शाह के ऑफिस के बाहर विरोध के दौरान ड्रैग किया गया। TMC का कहना है कि I-PAC पार्टी का आधिकारिक IT और चुनावी टीम है, न कि कोई निजी कंपनी।

यह घटना 2026 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की राजनीति को और गरमा रही है। ED ने स्पष्ट किया कि छापेमारी राजनीतिक नहीं, बल्कि कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की है। BJP ने ममता पर “सबूत नष्ट करने” का आरोप लगाया है। दोनों पक्षों की याचिकाएं कोर्ट में लंबित हैं, और स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं।

यह टकराव बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, जहां केंद्र और राज्य के बीच एजेंसियों का इस्तेमाल पहले से ही विवादास्पद रहा है।

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