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डॉलर के मुकाबले रियाल की भयंकर गिरावट: ईरान की सड़कों पर छात्रों ने उतरकर किया विरोध प्रदर्शन

डॉलर के मुकाबले रियाल की भयंकर गिरावट: ईरान की सड़कों पर छात्रों ने उतरकर किया विरोध प्रदर्शन

तेहरान, 31 दिसंबर 2025: ईरान में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। देश की मुद्रा ईरानी रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है, जिससे महंगाई चरम पर है। ओपन मार्केट में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 1.38 से 1.45 मिलियन रियाल तक पहुंच गई – साल भर में रियाल की वैल्यू आधी हो चुकी है। दिसंबर में इन्फ्लेशन रेट 42.5% तक पहुंच गया, फूड आइटम्स की कीमतें 72% तक बढ़ीं। इस आर्थिक त्रासदी से तंग आकर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं – बाजार व्यापारी, दुकानदार और अब छात्र भी शामिल हो गए हैं।

छात्रों का सड़कों पर उतरना: प्रदर्शन तीसरे दिन में

प्रदर्शन की शुरुआत रविवार को तेहरान के ग्रैंड बाजार और मोबाइल मार्केट्स से हुई, जहां दुकानदारों ने शटर डाउन कर हड़ताल की। सोमवार को यह अन्य शहरों में फैला, और मंगलवार को तेहरान, इस्फहान, याज्द, जंजान समेत कई शहरों के यूनिवर्सिटी कैंपस में छात्रों ने मार्च निकाले। छात्र नारे लगा रहे हैं – “डेथ टू द डिक्टेटर”, “फ्रीडम” और “डेथ टू इस्लामिक रिपब्लिक” जैसे स्लोगन्स। कुछ जगहों पर सिक्योरिटी फोर्सेस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, टियर गैस का इस्तेमाल हुआ। यह 2022 की महसा अमीनी प्रदर्शनों के बाद सबसे बड़े विरोध हैं।

आर्थिक संकट की वजहें

सैंक्शंस का असर: सितंबर में यूएन ने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर फिर सैंक्शंस लगाए, जून में इजरायल-अमेरिका के हमलों से अर्थव्यवस्था को झटका।

ट्रंप की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ पॉलिसी: ऑयल एक्सपोर्ट्स प्रभावित, विदेशी एसेट्स फ्रीज।

इंटरनल इश्यूज: करप्शन, मिसमैनेजमेंट, पेट्रोलियम प्राइस हाइक।

सेंट्रल बैंक गवर्नर मोहम्मद रेजा फरजिन ने इस्तीफा दे दिया, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने नया गवर्नर नियुक्त किया।

राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने कहा – “लोगों की वैध मांगें सुनेंगे, डायलॉग करेंगे।” लेकिन प्रदर्शनकारियों का गुस्सा सिर्फ इकोनॉमी तक नहीं, रिजीम के खिलाफ भी है। कुछ नारे पूर्व राजशाही (पहलवी) के समर्थन में लगे।

आगे क्या?

विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रदर्शन और फैल सकते हैं, क्योंकि लोगों की क्रय शक्ति खत्म हो रही है। सरकार ने कुछ जगहों पर इंटरनेट शटडाउन और सिक्योरिटी बढ़ाई है। नए साल में ईरान की अर्थव्यवस्था और राजनीति पर दुनिया की नजरें टिकी हैं। क्या यह संकट शांत होगा या बड़ा बवाल बनेगा? देखते रहिए।

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