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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की INS वाघशीर पर ऐतिहासिक समुद्री यात्रा: भारत की नौसैनिक ताकत का प्रदर्शन

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की INS वाघशीर पर ऐतिहासिक समुद्री यात्रा: भारत की नौसैनिक ताकत का प्रदर्शन

कर्नाटक/नई दिल्ली, 28 दिसंबर 2025: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को कर्नाटक के करवार नौसैनिक अड्डे से भारतीय नौसेना की अत्याधुनिक पनडुब्बी INS वाघशीर पर समुद्री यात्रा (सी सॉर्टी) की। यह यात्रा पश्चिमी तट पर हुई, जिसमें नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने उनका साथ दिया। राष्ट्रपति, जो सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर हैं, ने नौसेना की यूनिफॉर्म पहनकर पनडुब्बी में प्रवेश किया और नौसैनिकों का अभिवादन स्वीकार किया।

यह यात्रा ऐतिहासिक इसलिए है क्योंकि मुर्मू दूसरी राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने पनडुब्बी पर सॉर्टी की—पहले पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने ऐसा किया था। इससे पहले मुर्मू सु-30 एमकेआई और राफेल फाइटर जेट पर उड़ान भर चुकी हैं, जिससे वे दो फाइटर जेट्स पर सॉर्टी करने वाली पहली राष्ट्रपति भी हैं। इस यात्रा से नौसेना की क्षमताओं पर राष्ट्रपति का विश्वास और गर्व झलकता है।

INS वाघशीर क्यों खास है?

INS वाघशीर (S26) प्रोजेक्ट-75 के तहत कलवरी क्लास (स्कॉर्पीन डिजाइन) की छठी और अंतिम पनडुब्बी है, जिसे जनवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कमीशन किया था। मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने फ्रांस की नेवल ग्रुप के साथ मिलकर इसे बनाया। यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित है और ‘मेक इन इंडिया’ की मिसाल है।

इसकी प्रमुख विशेषताएं:

स्टेल्थ क्षमता: उन्नत ध्वनि अवशोषण तकनीक, कम शोर स्तर और हाइड्रोडायनामिक डिजाइन से दुश्मन रडार से छिपकर हमला कर सकती है।

हथियार: 6 ट्यूबों से 18 टॉरपीडो या एंटी-शिप मिसाइल दाग सकती है।

स्पीड और रेंज: सरफेस पर 11 नॉट्स, सबमर्ज्ड 20 नॉट्स स्पीड; 350 मीटर गहराई तक गोता और 50 दिन समुद्र में रहने की क्षमता।

मिशन: एंटी-सर्फेस/एंटी-सबमरीन वारफेयर, इंटेलिजेंस गेदरिंग, स्पेशल ऑपरेशंस आदि।

यह पनडुब्बी इंडियन ओशन में भारत की सामरिक ताकत बढ़ाती है। राष्ट्रपति की यात्रा से नौसेना का मनोबल ऊंचा हुआ है।

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