उत्तराखंड में वन्यजीवों का बढ़ता आतंक: पहाड़ों से राजधानी तक भालू, गुलदार और हाथी का खौफ
उत्तराखंड में वन्यजीवों का बढ़ता आतंक: पहाड़ों से राजधानी तक भालू, गुलदार और हाथी का खौफ
देहरादून, 27 दिसंबर 2025: उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष चरम पर पहुंच गया है। पहाड़ी जिलों से लेकर राजधानी देहरादून तक भालू, गुलदार (तेंदुआ) और जंगली हाथियों के हमले लोगों की नींद उड़ा रहे हैं। साल 2025 में अब तक 544 से ज्यादा हमले दर्ज हो चुके हैं, जिसमें दर्जनों मौतें और सैकड़ों घायल हुए हैं। विशेषज्ञ इसे ‘ओपन सफारी’ जैसी स्थिति बता रहे हैं, जहां जंगली जानवर गांवों, कस्बों और शहरों में घुस रहे हैं।
भालू और गुलदार सबसे बड़ा खतरा: इस साल भालू के हमलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है—74 से ज्यादा घटनाएं, 7 मौतें और कई घायल। पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी जैसे जिलों में भालू घरों में घुस रहे हैं, दुकानों के गेट तोड़ रहे हैं और लोगों पर हमला कर रहे हैं। हाल ही में केदारनाथ मार्ग पर लिंचोली में भालू ने दुकान का गेट तोड़ा। गुलदार के हमलों में भी 12 मौतें और 88 घायल दर्ज। देहरादून में भी भालू ने महिला पर हमला किया।
हाथियों का उत्पात मैदानों में: हरिद्वार, उधम सिंह नगर और देहरादून में हाथी फसलों को रौंद रहे हैं और लोगों पर हमला कर रहे हैं। डोईवाला में मॉर्निंग वॉक पर निकले व्यक्ति को हाथी ने उठाकर पटक दिया। कॉर्बेट और राजाजी पार्क के आसपास हाथियों की संख्या बढ़ने से संघर्ष बढ़ा है।
कारण और सरकार के कदम: जलवायु परिवर्तन से भालू की हाइबरनेशन प्रभावित, जंगलों की कटाई और मानव अतिक्रमण मुख्य वजहें। सीएम पुष्कर धामी ने हर जिले में वन्यजीव स्टेरलाइजेशन सेंटर, सोलर फेंसिंग और रेंजर्स को ज्यादा अधिकार देने का ऐलान किया। मुआवजा 10 लाख तक बढ़ाया गया।
लोगों में दहशत इतनी कि कई गांव खाली हो रहे हैं, स्कूल ऑनलाइन शिफ्ट हो रहे। क्या यह संघर्ष काबू में आएगा? विशेषज्ञ लंबे समय की रणनीति की मांग कर रहे हैं।
