WSJ रिपोर्ट पर विवाद: भारत की सीमा तैयारी को ‘युद्ध की धमकी’ क्यों बताया जा रहा?
WSJ रिपोर्ट पर विवाद: भारत की सीमा तैयारी को ‘युद्ध की धमकी’ क्यों बताया जा रहा?
नई दिल्ली: अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक हालिया रिपोर्ट ने भारत-चीन सीमा पर विवाद खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट में भारत के हिमालयी क्षेत्र में सड़कें, सुरंगें, हवाई पट्टियां और सैन्य ठिकाने बनाने के प्रयासों को ‘चीन के साथ संभावित भविष्य के संघर्ष की तैयारी’ के रूप में चित्रित किया गया है। WSJ का कहना है कि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत ने अपनी रणनीति बदली और अब सैकड़ों मिलियन डॉलर खर्च कर बुनियादी ढांचा विकसित कर रहा है, ताकि चीन की तरह तेजी से सैनिक और सामग्री पहुंचाई जा सके।
रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि गलवान झड़प ने भारत को झकझोर दिया, क्योंकि चीन घंटों में सुदृढ़ीकरण भेज सकता था, जबकि भारत को दिनों या सप्ताह लगते थे। पूर्व सैन्य अधिकारियों जैसे मेजर जनरल अमृत पाल सिंह ने इसे ‘सोच में नाटकीय बदलाव’ बताया। भारत अब जोजिला और अतल जैसे सुरंगें, न्योमा जैसी ऊंची हवाई पट्टियां और 30 से अधिक हेलीपैड बना रहा है, जो रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार deterrence (निवारण) की रणनीति है।
हालांकि, इस रिपोर्ट पर भारत में तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कई विश्लेषकों और सोशल मीडिया यूजर्स का मानना है कि WSJ ने एकतरफा नजरिया अपनाया और भारत की इन तैयारियों को सिर्फ ‘युद्ध की धमकी’ के रूप में पेश किया, जबकि हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच डिसएंगेजमेंट समझौते हुए हैं, मोदी-शी बैठक हुई है और सीमा पर तनाव कम हुआ है। आलोचकों का कहना है कि रिपोर्ट में शांति प्रयासों, बातचीत और आर्थिक सहयोग की अनदेखी की गई, जिससे युद्ध की अफवाहें फैल सकती हैं। कुछ इसे ‘वार मॉन्गरिंग’ (युद्ध भड़काने वाला) नैरेटिव बता रहे हैं, जो अमेरिकी मीडिया की पुरानी आदत लगती है।
दूसरी तरफ, विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर विकास जरूरी है, क्योंकि चीन ने दशकों से तिब्बत और शिनजियांग में मजबूत नेटवर्क बनाया है। लेकिन क्या इसे सिर्फ युद्ध की तैयारी कहना उचित है? यह सवाल अब जोर पकड़ रहा है। दोनों देशों के बीच अविश्वास अभी बाकी है, लेकिन डिप्लोमेसी से रास्ता निकल सकता है।
