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अरावली संरक्षण में केंद्र का मजबूत कदम: नई खनन लीज पर पूर्ण रोक, ICFRE से संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार!

अरावली संरक्षण में केंद्र का मजबूत कदम: नई खनन लीज पर पूर्ण रोक, ICFRE से संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार!

नई दिल्ली। अरावली पर्वतमाला की सुरक्षा को लेकर विवादों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। पर्यावरण मंत्रालय ने गुजरात से दिल्ली तक पूरे अरावली क्षेत्र में नई खनन लीज देने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्देश सभी संबंधित राज्यों (दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात) को जारी कर दिया गया है। मंत्रालय ने इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन (ICFRE) को निर्देश दिया कि वह पूरे अरावली लैंडस्केप में अतिरिक्त क्षेत्रों की पहचान करे, जहां खनन पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए। इससे संरक्षित क्षेत्र का विस्तार होगा।

फैसले की मुख्य बातें:

नई लीज पर रोक: सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में, सस्टेनेबल माइनिंग प्लान (MPSM) तैयार होने तक कोई नई खनन लीज नहीं दी जाएगी। मौजूदा वैध खदानें सख्त नियमों के साथ चल सकती हैं।

संरक्षित क्षेत्र विस्तार: ICFRE MPSM तैयार करते हुए इकोलॉजिकल, जियोलॉजिकल और लैंडस्केप स्तर पर नए नो-माइनिंग जोन पहचानेगा। कोर/इनवायोलेट क्षेत्रों (वन्यजीव कॉरिडोर, जल स्रोत, संरक्षित वन) में खनन पहले से प्रतिबंधित है।

परिभाषा का आधार: सुप्रीम कोर्ट ने 100 मीटर ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली हिल्स माना, और 500 मीटर दायरे में जुड़ी पहाड़ियां रेंज का हिस्सा। सरकार का दावा – इससे 90% से ज्यादा क्षेत्र संरक्षित रहेगा।

विवाद की वजह:

सुप्रीम कोर्ट के 20 नवंबर 2025 के फैसले में ऊंचाई-आधारित परिभाषा स्वीकार करने से विपक्ष और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया। आरोप लगा कि इससे 90% अरावली असुरक्षित हो जाएगी और खनन बढ़ेगा। राजस्थान में प्रदर्शन हुए, #SaveAravalli कैंपेन चला। लेकिन पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि कोई रिलैक्सेशन नहीं, अवैध खनन रोकने और एकरूपता के लिए यह जरूरी था।

पर्यावरण महत्व:

अरावली थार रेगिस्तान की पूर्व दिशा में फैलाव रोकती है, जल संरक्षण करती है और जैव विविधता का घर है। अवैध खनन से पहले कई पहाड़ियां गायब हो चुकी हैं। केंद्र की अरावली ग्रीन वॉल परियोजना भी संरक्षण को बढ़ावा दे रही है।

यह फैसला अरावली की रक्षा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। MPSM तैयार होने के बाद सस्टेनेबल विकास और संरक्षण का बैलेंस बनेगा। पर्यावरण प्रेमी सतर्क हैं, लेकिन सरकार का दावा मजबूत सुरक्षा का है!

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