8.10 करोड़ की साइबर ठगी का सदमा: पूर्व IPS अमर सिंह चहल ने खुद को मारी गोली, 12 पेज के नोट में बयां किया दिल का दर्द
8.10 करोड़ की साइबर ठगी का सदमा: पूर्व IPS अमर सिंह चहल ने खुद को मारी गोली, 12 पेज के नोट में बयां किया दिल का दर्द
पंजाब के पटियाला से दिल दहला देने वाली खबर आई है। रिटायर्ड आईजी और पूर्व IPS अधिकारी अमर सिंह चहल ने 22 दिसंबर 2025 को अपने घर में खुद को गोली मार ली। गनमैन की लाइसेंसी रिवॉल्वर से छाती में गोली मारने के बाद वे गंभीर रूप से घायल हो गए और पटियाला के पार्क अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी की, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। घटनास्थल से पुलिस को 12 पेज का सुसाइड नोट मिला, जिसमें चहल ने 8.10 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का पूरा दर्द बयां किया है।
नोट मुख्य रूप से पंजाब के DGP गौरव यादव को संबोधित है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम का भी जिक्र है। चहल ने लिखा, “अत्यंत दुख, निराशा और पीड़ा के साथ सूचित करना चाहता हूं कि मुझे साइबर ठगों ने वेल्थ इक्विटी एडवाइजर बनकर 8.10 करोड़ रुपये की ठगी की है। मैं मानता हूं कि पैसे देते समय मैंने पूरी सावधानी नहीं बरती।” उन्होंने ठगों को “F-777 DBS Wealth Equity Research Group” नाम का बताया, जो WhatsApp और Telegram पर सक्रिय था। यह ग्रुप खुद को DBS बैंक और उसके CEO से जुड़ा बताता था, साथ ही SEBI और सरकार से अधिकृत होने का झूठा दावा करता था।
ठगी की कहानी अक्टूबर 2025 से शुरू हुई। ग्रुप में “डॉ. राजत वर्मा” नाम के व्यक्ति ने रोज स्टॉक टिप्स, IPO अलॉटमेंट, OTC ट्रेड और क्वांटिटेटिव फंड्स में 30-50% रिटर्न का लालच दिया। फर्जी डैशबोर्ड दिखाकर भरोसा जमाया गया। चहल ने पहले 1 करोड़ अपनी जमा पूंजी लगाई, फिर दोस्तों-रिश्तेदारों से 7.5 करोड़ उधार लेकर ट्रांसफर किए। जब निकासी की कोशिश की, तो “सर्विस फीस”, “टैक्स” और अन्य चार्जेस के नाम पर और पैसे मांगे गए। अंत में पैसा ब्लॉक हो गया और ठगी का पता चला।
चहल ने नोट में गहरी शर्मिंदगी, परिवार पर बोझ और मानसिक पीड़ा का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि ठगों का नेटवर्क इतना परिष्कृत है कि केवल SIT या केंद्रीय एजेंसी ही इसे तोड़ सकती है। परिवार की सुरक्षा और कर्जदारों से राहत की अपील की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ठगों के अलावा कोई जिम्मेदार नहीं।
पटियाला SSP वरुण शर्मा ने बताया कि जांच चल रही है – नोट की प्रमाणिकता, बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल सबूतों की पड़ताल हो रही है। चहल 1990 बैच के IPS थे और 2019 में IG रैंक से रिटायर हुए। वे 2015 के कोटकपूरा फायरिंग केस में भी आरोपी हैं, लेकिन सुसाइड नोट में इसका जिक्र नहीं।
यह मामला साइबर ठगी की बढ़ती पहुंच को उजागर करता है – यहां तक कि अनुभवी पूर्व पुलिस अधिकारी भी शिकार बन गए। विशेषज्ञ कहते हैं कि हाई रिटर्न का लालच, फर्जी ग्रुप्स और सोशल इंजीनियरिंग से बचने के लिए सतर्कता जरूरी है। चहल की हालत सुधरने की दुआ करें, साथ ही साइबर सिक्योरिटी पर ध्यान दें।
