अरावली विवाद पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव का बड़ा बयान, कहा- ‘90% से ज्यादा क्षेत्र संरक्षित, कोई छूट नहीं दी गई’
अरावली विवाद पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव का बड़ा बयान, कहा- ‘90% से ज्यादा क्षेत्र संरक्षित, कोई छूट नहीं दी गई’
नई दिल्ली/सुंदरबन, 22 दिसंबर 2025: अरावली पर्वत श्रृंखला की नई परिभाषा को लेकर मचे घमासान के बीच केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने स्थिति साफ की है। सुंदरबन टाइगर रिजर्व में प्रेस कॉन्फ्रेंस और ANI को दिए इंटरव्यू में मंत्री ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकृत परिभाषा से अरावली का 90% से अधिक क्षेत्र पूरी तरह संरक्षित रहेगा। “किसी भी तरह की कोई छूट नहीं दी गई है, भ्रम और झूठ फैलाया जा रहा है।”
मंत्री के मुख्य बयान:
अरावली का कुल क्षेत्रफल 1.44 लाख वर्ग किलोमीटर है, जिसमें केवल 0.19% क्षेत्र में ही खनन की संभावना है।
नई परिभाषा (100 मीटर ऊंचाई वाली पहाड़ियां और उनके आधार सहित पूरा फैलाव) से संरक्षण और मजबूत हुआ है। दो पहाड़ियों के बीच 500 मीटर का गैप भी रेंज का हिस्सा माना जाएगा।
दिल्ली में अरावली में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है।
सुप्रीम कोर्ट ने नए खनन पट्टों पर रोक लगाई हुई है, जब तक सस्टेनेबल माइनिंग प्लान (ICFRE की मदद से) तैयार नहीं हो जाता।
“कुछ यूट्यूब चैनल और लोग जानबूझकर भ्रम फैला रहे हैं कि 100 मीटर केवल ऊपरी हिस्से तक है – यह पूरी तरह गलत है।”
मंत्री ने ग्रीन अरावली मूवमेंट की तारीफ करते हुए कहा कि सरकार अरावली को हरा-भरा रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अरावली दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, इसका संरक्षण उत्तर भारत के पर्यावरण के लिए जरूरी है।
विवाद की पृष्ठभूमि: सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में केंद्र की समिति की सिफारिश पर अरावली की एकसमान परिभाषा स्वीकार की, जिसे विपक्ष और पर्यावरणविद् बड़े पैमाने पर खनन की साजिश बता रहे हैं। ‘सेव अरावली’ कैंपेन चल रहा है।
सरकार ने अपील की कि गलत जानकारी फैलाना बंद करें। मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, आगे की सुनवाई पर नजर बनी हुई है।
