‘पावर के मायने अब बदल गए हैं…’: जयशंकर ने बहुध्रुवीय दुनिया पर दिया बड़ा बयान, कोई देश हर मुद्दे पर इच्छा नहीं थोप सकता
‘पावर के मायने अब बदल गए हैं…’: जयशंकर ने बहुध्रुवीय दुनिया पर दिया बड़ा बयान, कोई देश हर मुद्दे पर इच्छा नहीं थोप सकता
पुणे, 20 दिसंबर 2025: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आज सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए वैश्विक उथल-पुथल पर महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि “पावर के मायने अब बदल गए हैं” और दुनिया अब बहुध्रुवीय (मल्टीपोलर) हो चुकी है, जहां कई केंद्रों से शक्ति और प्रभाव काम कर रहा है। कोई देश, कितना भी ताकतवर क्यों न हो, हर मुद्दे पर अपनी इच्छा नहीं थोप सकता।
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक क्रम में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां एक या दो देश प्रमुख थे, अब कई केंद्र उभर चुके हैं। शक्ति की परिभाषा अब सिर्फ सैन्य बल तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापार, ऊर्जा, प्राकृतिक संसाधन, तकनीक और मानव प्रतिभा जैसे पहलू भी शामिल हो गए हैं। इससे वैश्विक शक्ति को समझना और जटिल हो गया है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव स्वाभाविक प्रतिस्पर्धा पैदा कर रहा है, जो नया संतुलन बना रहा है।
विदेश मंत्री ने भारत की बढ़ती भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि दुनिया अब भारत को पहले से ज्यादा सकारात्मक नजरिए से देखती है। ‘ब्रांड इंडिया’ मजबूत हो रहा है और भारत वैश्विक संकटों में मदद करने वाला प्रमुख देश बन चुका है। हालांकि, बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते भारत को आधुनिक विनिर्माण क्षमता विकसित करनी होगी, ताकि तकनीकी बदलावों से पीछे न रह जाए।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया यूक्रेन-रूस संघर्ष, मध्य पूर्व तनाव और अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दों से जूझ रही है। जयशंकर ने 80 साल पुरानी वैश्विक व्यवस्था के ढहने का भी जिक्र किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान भारत की सक्रिय विदेश नीति और ‘विकसित भारत’ की दिशा को रेखांकित करता है। युवाओं से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वे वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति और मूल्यों को आगे बढ़ाएं।
यह संबोधन भारत की उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में नई पहचान को मजबूत करता है।
