बहराइच सांप्रदायिक हिंसा: राम गोपाल हत्याकांड में मुख्य आरोपी सरफराज को फांसी, 9 को उम्रकैद – 14 महीने में न्याय!
बहराइच सांप्रदायिक हिंसा: राम गोपाल हत्याकांड में मुख्य आरोपी सरफराज को फांसी, 9 को उम्रकैद – 14 महीने में न्याय!
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में पिछले साल दुर्गा विसर्जन के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा के राम गोपाल मिश्रा हत्याकांड में कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। मुख्य आरोपी मोहम्मद सरफराज अहमद उर्फ रिंकू को फांसी की सजा सुनाई गई, जबकि अन्य 9 दोषियों को उम्रकैद की सजा दी गई। प्रत्येक पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। विशेष अदालत ने 10 दोषियों को दोषी करार दिया, जबकि 3 आरोपी बरी हो गए। यह फैसला 13 अक्टूबर 2024 की घटना के ठीक 14 महीने बाद आया, जो तेज न्याय का उदाहरण है।
घटना महसी तहसील के महराजगंज बाजार में हुई थी। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान म्यूजिक बजाने को लेकर विवाद भड़का। राम गोपाल मिश्रा (28 वर्ष) रेहुआ मंसूर गांव के निवासी थे, जो जुलूस में शामिल थे। विवाद बढ़ने पर वे छत पर चढ़कर हरे झंडे हटाने लगे, तभी भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। आरोपी सरफराज ने गोली मार दी, और अन्य ने तलवार से वार किए। राम गोपाल की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद हिंसा भड़क गई – दुकानें जलाई गईं, वाहन फूंके गए, और कई जगह पथराव हुआ। 6 लोग घायल हुए, जिसमें पुलिसकर्मी भी शामिल थे।
पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। 13 आरोपी गिरफ्तार हुए, जिनमें अब्दुल हामिद, मोहम्मद तलीब उर्फ सबलू, शकील अहमद उर्फ बबलू और खुर्शीद शामिल थे। सरफराज और तलीब पर एनकाउंटर में गोली चली, दोनों घायल हुए। मार्च 2025 में 5 पर NSA लगाया गया। FIR में IPC की धारा 302 (हत्या), 153A (सांप्रदायिक वैमनस्य) और 307 (हत्या का प्रयास) शामिल। मृतक के भाई हरि मिलन की शिकायत पर केस दर्ज हुआ।
मृतक की पत्नी रोली मिश्रा ने कहा, “मेरे पति के हत्यारों को फांसी मिलनी चाहिए। न्याय मिला, लेकिन दर्द कम नहीं हुआ।” राम गोपाल की मौत के बाद CM योगी आदित्यनाथ ने परिवार से मुलाकात की और 25 लाख मुआवजा व नौकरी का ऐलान किया। बहराइच SP ने कहा, “शांति बनाए रखने के लिए फोर्स तैनात रहेगी।”
विपक्ष ने इसे ‘राजनीतिक न्याय’ बताया, लेकिन सरकार ने ‘तेज कार्रवाई’ का श्रेय लिया। क्या यह फैसला सांप्रदायिक सद्भाव को मजबूत करेगा? बहराइच में अब शांति है, लेकिन घाव गहरे हैं।
