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नासिक के आदिवासी बस्ती में 12 बच्चों की मां पर 6 बच्चों को बेचने का आरोप, गरीबी ने तोड़ा मां का सब्र!

नासिक के आदिवासी बस्ती में ममता का काला साया: 12 बच्चों की मां पर 6 बच्चों को बेचने का आरोप, गरीबी ने तोड़ा मां का सब्र!

नासिक: महाराष्ट्र के नासिक जिले के त्र्यंबकेश्वर तालुका में एक ऐसी घटना सामने आई है, जो मानवता को शर्मसार करने वाली है। आदिवासी बहुल टाके देवगांव (वावी हर्ष) की 45 वर्षीय बच्चुबाई विष्णू हंडोगे पर अपने 12 बच्चों में से 6 को पैसे के बदले बेचने का गंभीर आरोप लगा है। गरीबी और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने इस मां को इतना बेबस बना दिया कि उसे ममता का गला घोंटना पड़ा। पुलिस ने पूरे परिवार को हिरासत में ले लिया है, जबकि सामाजिक कार्यकर्ता गहन जांच की मांग कर रहे हैं। यह मामला आदिवासी इलाकों में छिपी आर्थिक बदहाली को उजागर कर रहा है।

बच्चुबाई ने कुल 14 गर्भधारण किए, जिनमें से दो गर्भपात और एक बच्चे की मौत हो गई। वर्तमान में उनके पास 11 बच्चे-बच्चियां हैं, लेकिन जांच में पता चला कि 6 को ‘विक्री’ या ‘दत्तक’ के नाम पर सौंप दिया गया। स्थानीय मराठी मीडिया ‘देशदूत’ की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चुबाई ने स्वीकार किया कि आर्थिक तंगी के कारण वे बच्चों का पालन-पोषण नहीं कर पा रही थीं। टाके देवगांव जैसे आदिवासी पाड़ों में बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार की भारी कमी है। बच्चुबाई का पति विष्णू मजदूरी करता है, लेकिन परिवार का गुजारा मुश्किल से चलता है। आरोप है कि बच्चों को 10-20 हजार रुपये में बेचा गया, जो खरीदारों ने ‘दत्तक’ का बहाना बनाया।

मामला 10 अक्टूबर 2025 को तब खुला, जब बच्चुबाई ने एक कम वजन वाले बेटे को जन्म दिया। स्वास्थ्य विभाग ने आशा कार्यकर्ताओं को घर भेजा, लेकिन बच्चा गायब था। कार्यकर्ताओं को संदेह हुआ जब घर में बच्चों की संख्या मेल नहीं खाई। आशा सेविकाओं ने ग्राम पंचायत और पुलिस को सूचना दी। प्रारंभिक जांच में बच्चुबाई ने बताया कि नवजात को ‘रिश्तेदारों’ को सौंप दिया, लेकिन सबूतों से विक्री का खुलासा हुआ। पुलिस ने IPC की धारा 370 (मानव तस्करी) और POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। सुल्तानपुर थाने के PSI ने कहा, “परिवार से पूछताछ जारी है। खरीदारों की तलाश में छापेमारी हो रही है।”

सामाजिक कार्यकर्ता संगठन ‘महिला उत्थान मंडल’ की प्रमुख ने कहा, “यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, पूरे आदिवासी क्षेत्र की बदहाली है। सरकारी योजनाएं कागजों तक सीमित हैं। हमें बच्चों की तत्काल खोज और परिवार को सहायता चाहिए।” रिपोर्ट में दावा किया गया कि बच्चुबाई ने 6 बच्चों को बेचा, जो अब नासिक और आसपास के जिलों में बिखरे हैं। जिला कलेक्टर ने विशेष जांच टीम गठित की है, जो POCSO कोर्ट में रिपोर्ट देगी।

यह घटना महाराष्ट्र के आदिवासी इलाकों में व्याप्त गरीबी, कुपोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को रेखांकित करती है। त्र्यंबकेश्वर जैसे क्षेत्र, जहां कुंभ मेला की चमक है, वहां ग्रामीणों की जिंदगी अंधेरे में डूबी है। बच्चुबाई का परिवार झोपड़ी में रहता है, जहां बिजली-पानी का नामोनिशान नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं तस्करी नेटवर्क को बढ़ावा देती हैं। क्या यह मामला आदिवासी कल्याण योजनाओं में सुधार लाएगा? जांच के नतीजे इंतजार कराएंगे।

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