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लाल किला ब्लास्ट केस: कश्मीरी मौलवी समेत 3 डॉक्टरों की NIA कस्टडी 4 दिन बढ़ी, साजिश की परतें खोलने को मिला समय

लाल किला ब्लास्ट केस: कश्मीरी मौलवी समेत 3 डॉक्टरों की NIA कस्टडी 4 दिन बढ़ी, साजिश की परतें खोलने को मिला समय

दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए भीषण कार ब्लास्ट केस में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को बड़ी राहत मिली है। पटियाला हाउस कोर्ट ने सोमवार को कश्मीर के मौलवी इरफान अहमद वागे समेत तीन डॉक्टरों – डॉ. मुजम्मिल गनई, डॉ. अदील राथर और डॉ. शाहीना सईद – की NIA कस्टडी 4 दिन के लिए बढ़ा दी। यह फैसला 29 नवंबर को मिली 10 दिन की कस्टडी खत्म होने के बाद आया, जब NIA ने आरोपियों को प्रिंसिपल सेशंस जज अंजू बजाज चांदना के समक्ष पेश किया। कोर्ट में पेशी के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, और NIA ने गहन पूछताछ की जरूरत बताते हुए रिमांड बढ़ाने की मांग की, जिसे मंजूर कर लिया गया।

इस ब्लास्ट में आई-10 कार में विस्फोट से 15 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 32 से अधिक घायल हुए। NIA की जांच में यह साफ हो चुका है कि यह एक सुनियोजित आतंकी साजिश थी, जिसमें आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर नबी मुख्य प्लानर था। उमर ने कश्मीर में युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें भर्ती किया था। मौलवी इरफान अहमद वागे पर आरोप है कि उन्होंने धार्मिक कट्टरता फैलाकर युवाओं को कट्टर बनाया, जबकि तीनों डॉक्टरों पर साजिश में मेडिकल सहायता, फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने का शक है। NIA का दावा है कि आरोपी एक व्हाइट कॉलर मॉड्यूल का हिस्सा हैं, जो डॉक्टरों और धार्मिक नेताओं के जरिए फंड जुटाते थे।

NIA ने कोर्ट को बताया कि बढ़ी कस्टडी में आरोपियों से साजिश की गहराई, फंडिंग सोर्स, अन्य सहयोगियों और ड्रोन मॉडिफिकेशन जैसे पहलुओं पर पूछताछ होगी। इससे पहले, मुख्य आरोपी आमिर रशीद अली (कार का मालिक) की कस्टडी 2 दिसंबर को 7 दिन बढ़ाई गई थी, जबकि शोएब अली और जसीर बिलाल वानी (उर्फ दानिश) की रिमांड भी क्रमशः 10 और 7 दिन बढ़ चुकी है। कुल 7 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनमें से अधिकांश जम्मू-कश्मीर, यूपी, हरियाणा और एमपी से पकड़े गए। NIA ने छापेमारी में कई डिजिटल डिवाइस, फर्जी दस्तावेज और विस्फोटक सामग्री बरामद की है।

कोर्ट ने NIA की दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि जांच के लिए अतिरिक्त समय जरूरी है, लेकिन मानवाधिकारों का उल्लंघन न हो। विपक्ष ने मामले पर सवाल उठाए हैं, लेकिन गृह मंत्रालय ने इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला’ बताते हुए NIA को पूरा समर्थन दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉड्यूल ISIS या लश्कर से जुड़ा हो सकता है, और पूछताछ से बड़ा खुलासा हो सकता है। दिल्ली पुलिस और NSG ने लाल किले के आसपास सुरक्षा और सख्त कर दी है।

यह केस न केवल दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि कट्टरता के प्रसार को रोकने की चुनौतियों को उजागर करता है। NIA की अगली रिपोर्ट 12 दिसंबर को कोर्ट में आएगी। क्या साजिश की पूरी कड़ी उजागर होगी? जांच जारी है।

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