राजनीति

वंदे मातरम बहस में राजनाथ सिंह का समापन भाषण: ‘गीत को सांप्रदायिक रंग देकर अन्याय किया गया, आजादी के बाद इसे किनारे किया’

वंदे मातरम बहस में राजनाथ सिंह का समापन भाषण: ‘गीत को सांप्रदायिक रंग देकर अन्याय किया गया, आजादी के बाद इसे किनारे किया’

लोकसभा में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर 10 घंटे की विशेष चर्चा के समापन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस गीत के साथ ‘गंभीर अन्याय’ हुआ है। उन्होंने इसे ‘सांप्रदायिक रंग’ देकर तोड़ा गया बताते हुए स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका पर जोर दिया। सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण को ‘प्रेरणादायक’ बताया और गीत को राष्ट्र की धड़कन व दर्शन का प्रतीक कहा।

राजनाथ सिंह ने कहा, “वंदे मातरम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्र की धड़कन और दर्शन बन गया। यह न केवल एक गीत था, बल्कि राष्ट्र को जीवंत करने वाला मंत्र था, जो दुनिया भर में गूंजा।” उन्होंने गीत की ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डाला: “यह गीत लोगों को राष्ट्र के लिए जीवन बलिदान करने की प्रेरणा देता था। स्वतंत्रता आंदोलन को बांधने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।” सिंह ने राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के साथ तुलना की: “राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत भारत माता के दो आंखें हैं। राष्ट्र को दोनों पर गर्व है।”

सिंह ने स्वतंत्र भारत में गीत के साथ हुए अन्याय पर दुख जताया। “स्वतंत्र भारत में राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत को समान दर्जा देने का फैसला हुआ। जन गण मन हमारी संस्कृति का हिस्सा बन गया, लेकिन वंदे मातरम को किनारे कर दिया गया। इसे ‘एक्स्ट्रा’ की तरह व्यवहार किया गया।” उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधा: “1937 में मुस्लिम लीग के दबाव में कुछ छंद हटाए गए, जो तुष्टिकरण की राजनीति थी। गीत को सांप्रदायिक रंग देकर तोड़ा गया, जो विभाजन का बीज बना। आज जब हम इसकी विरासत को बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं, तो सवाल उठ रहे हैं? यह बहस एकता का प्रतीक है, विवाद की नहीं।”

राजनाथ ने इमरजेंसी का जिक्र कर कहा, “गीत ने तानाशाही को भी हराया। 50 वर्ष पूरे होने पर देश गुलामी में था, 100 वर्ष पर इमरजेंसी का काल। आज 150 वर्ष पर हम स्वतंत्र हैं और इसका साक्षी बन रहे हैं – यह गर्व का विषय है।” उन्होंने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना को ‘सभ्यता की धरोहर’ बताया और विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा, “यह चर्चा राष्ट्र को मजबूत करने के लिए है, न कि राजनीति के लिए।”

सिंह का भाषण लगभग 45 मिनट चला, जिसमें उन्होंने गीत को ‘राजनीतिक स्वतंत्रता का मंत्र’ और ‘औपनिवेशिक अवशेषों से मुक्ति का युद्धघोष’ कहा। यह समापन भाजपा की ओर से बहस का अंतिम बिंदु था, जहां उन्होंने एकता का संदेश दिया।

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