राजनीति

वंदे मातरम बहस: प्रियंका गांधी का केंद्र पर जोरदार हमला – ‘बंगाल चुनाव के लिए हो रही राजनीति, असली मुद्दों से भटकाव’

वंदे मातरम बहस: प्रियंका गांधी का केंद्र पर जोरदार हमला – ‘बंगाल चुनाव के लिए हो रही राजनीति, असली मुद्दों से भटकाव’

संसद का शीतकालीन सत्र जारी है। अब तक बीते पांच दिनों में से तीन दिन हंगामेदार रहे हैं। लोकसभा से बिलों को पास कर उन्हें राज्यसभा भेजा गया है। इस बीच SIR, BLO की मौतों का मुद्दा, इंडिगो एयरलाइंस का संकट और वंदे मातरम पर बहस ने सदन को गरमा दिया है। आज लोकसभा में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150वें वर्षगांठ पर 10 घंटे की विशेष चर्चा हुई, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। लेकिन कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने बहस को ‘राजनीतिक ड्रामा’ बताते हुए केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बहस बंगाल चुनाव की वजह से हो रही है, और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास है।

प्रियंका गांधी ने सदन में कहा, “वंदे मातरम पर बहस क्यों? यह गीत हमारी आत्मा है, स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक है। लेकिन आज इसकी जरूरत क्यों पड़ी? दो वजहें हैं – पहली, बंगाल में चुनाव नजदीक हैं और प्रधानमंत्री वहां अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं। दूसरी, सरकार को स्वतंत्रता सेनानियों पर नए आरोप लगाने का मौका चाहिए।” उन्होंने जोर देकर कहा, “आप चुनाव के लिए यहां हैं, हम देश के लिए। वंदे मातरम गाने से ज्यादा, इसे निभाना जरूरी है।” प्रियंका ने पीएम मोदी के भाषण पर कटाक्ष किया, “पीएम जी अच्छे भाषण देते हैं, लेकिन तथ्यों से खाली। नेहरू का पत्र चुनिंदा पढ़ा, पूरा संदर्भ छिपाया।” उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर का जिक्र किया, “1896 में टैगोर ने कांग्रेस रैली में इसे गाया, लेकिन पीएम ने इसका जिक्र तक नहीं किया। बंगाल को समझने की कोशिश ही नहीं की।”

पीएम मोदी ने बहस शुरू करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि 1937 में कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के दबाव में गीत के कुछ छंद हटा दिए, जो ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ का हिस्सा था। “वंदे मातरम स्वतंत्रता का मंत्र था, बलिदान का नारा। लेकिन कांग्रेस ने इसे विभाजित कर दिया, जो बाद में देश के बंटवारे का बीज बना।” मोदी ने नेहरू के नेताजी सुभाष चंद्र बोस को पत्र का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि गीत के कुछ भाग मुसलमानों को चिढ़ा सकते हैं। उन्होंने कांग्रेस को 50 बार नाम लेते हुए इमरजेंसी और विभाजन से जोड़ा।

प्रियंका ने पलटवार किया, “यह बहस चुनाव सुधारों से ध्यान भटकाने के लिए है। आप इलेक्टोरल रिफॉर्म्स पर चर्चा नहीं चाहते, जब तक यह न हो जाए।” उन्होंने वंदे मातरम को ‘साहस और त्याग का प्रतीक’ बताया, “यह ब्रिटिशों को डराता था, आजादी दिलाता था। 75 साल बाद बहस क्यों? सांप्रदायिकता फैलाने के लिए?” सदन में हंगामा मच गया जब यूनियन मिनिस्टर गजेंद्र सिंह शेखावत ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का नाम गलत उच्चारण किया – ‘चटर्जी’ की जगह ‘चटर्जी’। विपक्ष ने नारेबाजी की।

कांग्रेस ने आठ सांसदों – गौरव गोगोई, दीपेंद्र हुड्डा, बिमोल अकोइजम समेत – को बोलने का मौका दिया। गोगोई ने कहा, “कांग्रेस ने ही इसे राष्ट्रगीत का दर्जा दिया। भाजपा बंगाल को कभी समझ नहीं पाई।” राहुल गांधी ने बाहर ‘प्रियंका का भाषण सुनो’ कहकर समर्थन दिया। राज्यसभा में मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह चर्चा शुरू करेंगे।

यह बहस शीतकालीन सत्र का छठा दिन था, जहां SIR-BLO मौतों पर भी विपक्ष ने हमला बोला। इंडिगो संकट पर सवाल उठे, लेकिन वंदे मातरम ने राजनीतिक रंग ले लिया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह राष्ट्रवाद की परिभाषा तय करने की जंग है।

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