पराली जलाने पर सख्ती का असर: पंजाब-हरियाणा के किसानों पर 58 करोड़ का जुर्माना, मामलों में 53% की गजब गिरावट!
पराली जलाने पर सख्ती का असर: पंजाब-हरियाणा के किसानों पर 58 करोड़ का जुर्माना, मामलों में 53% की गजब गिरावट!
दिल्ली-एनसीआर की हवा को जहरीला बनाने वाले पराली जलाने के कांडों पर केंद्र सरकार की सख्ती रंग लाई है। पिछले दो सालों में पंजाब और हरियाणा के किसानों पर पराली जलाने के लिए कुल 58 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। आरटीआई के तहत मिली जानकारी से साफ है कि 2025 में पराली जलाने के मामलों में 53% की भारी कमी आई है, जो 2024 की तुलना में बड़ी राहत है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (सीएक्यूएम) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सफलता फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनों के वितरण और सख्त कानूनी कार्रवाई का नतीजा है।
आरटीआई डेटा से पता चलता है कि पिछले दो वर्षों में दोनों राज्यों में 8,600 से अधिक एफआईआर दर्ज हुईं। 2025 में पंजाब में 2,193 एफआईआर हुईं, जबकि हरियाणा में भी सख्ती बरती गई। जुर्माने के आंकड़े बताते हैं कि 2024 में पंजाब पर 21.80 करोड़ और हरियाणा पर 21.87 करोड़ रुपये का बोझ पड़ा था, लेकिन 2025 में यह घटकर पंजाब में 12.58 करोड़ और हरियाणा में 12.65 करोड़ रह गया। कुल मिलाकर 58 करोड़ का यह जुर्माना किसानों को सबक सिखाने का माध्यम बना। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने 2025 में 2,386 मामलों में 1.25 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया, जो पिछले साल के 2.14 करोड़ से 50% कम है। हरियाणा में भी 1,963 एफआईआर दर्ज हुईं, और भूमि रिकॉर्ड में 2,176 ‘रेड एंट्रीज’ की गईं, जिससे दोषियों को लोन, जमीन बिक्री और हथियार लाइसेंस से वंचित किया गया।
पराली जलाने के मामलों में कमी का ग्राफ चौंकाने वाला है। 2025 में पंजाब में 5,114 फार्म फायर दर्ज हुए, जो 2024 से 53% कम, 2023 से 86% कम, 2022 से 90% और 2021 से 93% कम है। हरियाणा में 662 मामले सामने आए, जो 2024 से 53%, 2023 से 71%, 2022 से 81% और 2021 से 91% की गिरावट दर्शाता है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने लोकसभा में कहा, “यह कमी एपिसोडिक घटना है, जो दिल्ली-एनसीआर की प्रदूषण समस्या को कम कर रही है।” 2018-19 से 2025-26 तक केंद्र ने पंजाब-हरियाणा समेत राज्यों को 4,090 करोड़ रुपये दिए, जिससे 2.6 लाख से अधिक सीआरएम मशीनें वितरित हुईं। छोटे किसानों को मुफ्त किराया उपलब्ध कराया गया, और 43,270 कस्टम हायरिंग सेंटर्स बनाए गए।
पराली का उपयोग भी बढ़ा है। 2024 में पंजाब में 5.96 मिलियन टन धान अवशेष का उपयोग हुआ, जो 2025 में 7.06 मिलियन टन हो गया। सीएक्यूएम ने ईंट भट्टों को पराली-आधारित पेलेट्स इस्तेमाल करने का आदेश दिया, जिससे मांग बढ़ी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पहले सख्ती बरतने का निर्देश दिया था, लेकिन अब यह प्रयास फल दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सफलता किसानों की जागरूकता और तकनीकी सहायता का परिणाम है। दिल्ली में 2025 में ‘गुड’ एयर क्वालिटी डेज 200 हो गए, जो 2016 के 110 से दोगुने हैं, और ‘वेरी पुअर’ व ‘सीवियर’ दिन 71 से घटकर 50 रह गए।
किसान संगठनों ने सराहना की, लेकिन छोटे किसानों के लिए सब्सिडी बढ़ाने की मांग की। यह कदम न केवल हवा साफ कर रहा, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बचा रहा है। आगे क्या? सीआरएम स्कीम को और मजबूत करने का समय है!
