बालाघाट में नक्सल उन्मूलन की बड़ी जीत: 10 इनामी नक्सलियों का सीएम मोहन यादव के सामने सरेंडर, 2.36 करोड़ का इनाम
बालाघाट में नक्सल उन्मूलन की बड़ी जीत: 10 इनामी नक्सलियों का सीएम मोहन यादव के सामने सरेंडर, 2.36 करोड़ का इनाम
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता हासिल हुई है। रविवार शाम को 10 हार्डकोर नक्सलियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने अपने हथियार डाल दिए, जो राज्य के नक्सल इतिहास में सबसे बड़ा सरेंडर माना जा रहा है। इनमें 6 पुरुष और 4 महिलाएं शामिल हैं, जिन पर महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के तीन राज्यों में कुल 2.36 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। सरेंडर करने वालों में सबसे बड़ा नाम 77 लाख के इनामी कमांडर सुरेंद्र उर्फ कबीर का है, जो कान्हा-भोरमदेव (केबी) डिवीजन का प्रमुख था। यह घटना केंद्र सरकार के मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने के लक्ष्य को मजबूत करती है।
सरेंडर की प्रक्रिया शनिवार रात (6 दिसंबर) शुरू हुई, जब नक्सली एक वनरक्षक की मदद से हॉक फोर्स (मध्य प्रदेश पुलिस की स्पेशल यूनिट) से संपर्क करने पहुंचे। उन्हें बालाघाट के पुलिस लाइन में रखा गया, जहां पूछताछ के बाद रविवार दोपहर करीब 2 बजे सीएम मोहन यादव के दौरे पर औपचारिक समारोह हुआ। नक्सलियों ने सीएम को AK-47, INSAS राइफल, SLR, BGL और अन्य हथियार सौंपे। कार्यक्रम में सीएम ने प्रत्येक सरेंडर करने वाले को भारतीय संविधान की प्रति भेंट की, जो मुख्यधारा में उनके पुनर्वास का प्रतीक था। सरेंडर करने वालों के नामों में कबीर उर्फ महेंद्र, नवीन, राकेश, समर उर्फ राजू अत्रम, लालसू, शिल्पा, जैशीला, जरीना, सोनी, जानकी और विक्रम शामिल हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि बाकी है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा, “यह सरेंडर नक्सल उन्मूलन अभियान की शुरुआत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में हम मध्य प्रदेश को 2026 तक पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाएंगे। नक्सलियों के पास दो रास्ते हैं – या तो सरेंडर करें या समाप्त हो जाएं।” उन्होंने सरेंडरियों को 15 वर्षीय पुनर्वास पैकेज का आश्वासन दिया, जिसमें वित्तीय सहायता, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और सुरक्षा शामिल है। यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनवरी 2026 से शुरू होने वाले व्यापक अभियान में 15 नए अस्थायी कैंप और 882 स्पेशल सपोर्ट स्क्वॉड पद स्थापित किए जाएं। उन्होंने बालाघाट को नक्सल प्रभावित जिले की श्रेणी से हटाने की सराहना की, जो केंद्र सरकार ने हाल ही में किया।
यह सरेंडर बालाघाट के कान्हा टाइगर रिजर्व और भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य के आसपास के क्षेत्रों में नक्सलियों की पकड़ कमजोर होने का संकेत है। जिले में पिछले 35 वर्षों से ‘रेड टेरर’ का साया था, लेकिन मध्य प्रदेश पुलिस की हॉक फोर्स और केंद्रीय बलों के संयुक्त अभियान से 2025 में ही 10 नक्सली मारे जा चुके हैं। नवंबर में भी एक 22 वर्षीय महिला नक्सली ने सरेंडर किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि सरेंडर नीति-2019 और विकास योजनाओं ने नक्सलियों को मुख्यधारा की ओर लौटने के लिए प्रेरित किया। विपक्ष ने इसे सराहा, लेकिन मांग की कि पुनर्वास पारदर्शी हो।
यह घटना न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए मिसाल है। केंद्र सरकार के अनुसार, 2025 तक 10,000 से अधिक नक्सली सरेंडर कर चुके हैं। क्या यह सरेंडर नक्सलवाद के अंत की घंटी है?
