अन्तर्राष्ट्रीय

‘पीएम मोदी और मैं मिलकर…’, भारत दौरे से पहले पुतिन का बड़ा बयान – US-यूरोप पर करारा हमला

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत दौरे से ठीक पहले अपना एजेंडा साफ कर दिया है। उन्होंने कहा, “पीएम मोदी और मैं भारतीय आयात को बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।” वीटीबी इन्वेस्टमेंट फोरम को संबोधित करते हुए पुतिन ने द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत करने पर जोर दिया, जो पिछले तीन सालों में तेजी से बढ़ा है। लेकिन साथ ही, उन्होंने यूरोप को “युद्ध का पक्ष चुनने वाला” बताते हुए तीखा प्रहार किया और अमेरिका पर भी अप्रत्यक्ष निशाना साधा। यह बयान 4-5 दिसंबर को होने वाले 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन से पहले आया है, जो वैश्विक कूटनीति में नया मोड़ ला सकता है।

व्यापार और आर्थिक सहयोग: मुख्य फोकस

पुतिन ने स्पष्ट कहा कि उनका दौरा “विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” को मजबूत करने का अवसर बनेगा। एजेंडे में शामिल हैं:

आयात-निर्यात वृद्धि: भारत को रूसी तेल, गैस और खनिजों का आयात बढ़ाना। द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 65 अरब डॉलर को पार कर चुका है।

रक्षा सौदे: अतिरिक्त S-400 एयर डिफेंस सिस्टम (5 स्क्वाड्रन) और Su-57 फाइटर जेट्स (2-3 स्क्वाड्रन) की खरीद। रूस इन्हें अमेरिकी F-35 का विकल्प बता रहा है।

परमाणु ऊर्जा और नागरिक विमानन: छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों का विकास और सिविल न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स का विस्तार।

अन्य क्षेत्र: क्रिटिकल मिनरल्स, निवेश प्रोजेक्ट्स, लेबर माइग्रेशन और स्पेस रिसर्च।

कुलमिलाकर, कई MoU साइन होने की उम्मीद है। पुतिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी अलग से मिलेंगे। क्रीमलिन ने इसे “व्यापक चर्चा का मंच” बताया है।

US-यूरोप पर तीखा प्रहार: ‘युद्ध का एजेंडा थोप रहे हैं’

पुतिन ने अपने भाषण में पश्चिमी देशों पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा, “यूरोप ने संवाद को छोड़ दिया है। वे युद्ध का पक्ष चुन चुके हैं। अगर यूरोप युद्ध लड़ना चाहता है, तो हम तैयार हैं।” यह बयान यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में आया, जहां पुतिन ने यूरोपीय देशों को “शांतिपूर्ण एजेंडे” से दूर बताया।

अमेरिका पर निशाना: ट्रंप प्रशासन की ओर इशारा करते हुए पुतिन ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 500% टैरिफ लगाने वाले ‘सैंक्शनिंग रूस एक्ट 2025’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर रहेगा।

यूरोपीय दबाव: ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के राजदूतों ने संयुक्त ओप-एड में पुतिन की आलोचना की, कहा “वे ही युद्ध खत्म कर सकते हैं।” पूर्व विदेश सचिव कानवाल सिब्बल ने इसे “कूटनीतिक अपमान” बताया।

यह बयान तब आया जब अमेरिका भारत को रूस से दूरी बनाने का दबाव डाल रहा है। लेकिन पीएम मोदी ने शांघाय कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) समिट में पुतिन का गर्मजोशी से स्वागत किया था, जो वैश्विक सत्ता संतुलन को दर्शाता है।

दिल्ली में हाई अलर्ट: पुतिन का ‘सीक्रेट कवर’ आगमन

भारत पहुंचने से पहले रूस की 50 सदस्यीय स्पेशल टीम दिल्ली में तैनात हो चुकी है। सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं – राजधानी को ‘किला’ में तब्दील कर दिया गया है। पुतिन ब्रीफकेस में यूरिन ले जाने और खाने की लैब जांच जैसे सुपरटाइट प्रोटोकॉल के साथ आएंगे। संभावित रूट: मॉस्को से सीधे दिल्ली, या मध्य एशिया/पाकिस्तान एयरस्पेस से बचते हुए। 124 देशों के ICC वारंट के बावजूद, भारत ने आश्वासन दिया है।

वैश्विक संदेश: भारत की स्वतंत्र विदेश नीति

यह दौरा अमेरिका-यूरोप के दबाव के बीच भारत की रूस के साथ मजबूत साझेदारी को रेखांकित करता है। ऑब्जर्वर्स का मानना है कि इससे भारत को सस्ता रूसी तेल और हथियार मिलेंगे, लेकिन पश्चिमी व्यापार समझौतों (जैसे EU FTA) पर असर पड़ सकता है। पुतिन का यह पहला भारत दौरा चार साल बाद है – क्या यह नई वैश्विक साझेदारियों की शुरुआत बनेगा?

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(रिपोर्ट: न्यूज डेस्क)

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